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Agra News: मोबाइल का अधिक प्रयोग बच्चों को कर रहा चिड़चिड़ेपन के शिकार

Thu, 13 Jun 2024 12:30 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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कासगंज। क्षमता से कहीं अधिक पढ़ाई, अभिभावकों की उम्मीदों का बोझ और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का अधिक प्रयोग लाडलों को बीमारी की तरफ धकेल रहा है। छोटे बच्चे भी अनिद्रा और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। इस तरह के करीब 100 से अधिक बच्चे प्रतिमाह मनोचिकित्सक के पास उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।आज की आधुनिक जीवनशैली में बच्चे भी बुजुर्गों वाली बीमारी नींद न आने और जल्दी गुस्सा आने की बीमारी से जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल के डॉ. देवेंद्र ने बताया कि यह बीमारी बच्चों को उनकी खुद की क्षमता से अधिक पढ़ाई करने, अभिभावकों को उनके बच्चों से अधिक अंक लाने की उम्मीदों का बोझ और मोबाइल, टीवी, गेमिंग बताया कि उनके पास हर माह कम से 80 से 100 बच्चे उपचार व परामर्श के लिए आ रहे हैं। अन्य चिकित्सकों के पास भी बच्चे उपचार के लिए जा रहे हैं।
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कक्षा 6 से 10वीं के विद्यार्थियों को हो रही अधिक दिक्कत
मनोचिकित्सक डॉ. हर्ष राठी ने बताया कि इनमें कक्षा 6 से 10 तक यानि 12 से 16 वर्ष तक के बच्चे अधिक हैं। यह बच्चे अधिक अंक लाने, कक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने की ललक में अपनी क्षमता से कहीं अधिक पढ़ाई करते हैं। दिन भर स्कूल और फिर शाम ट्यूशन में गुजर रही है। थोड़ा बहुत समय मिलता है तो घर में ही गैजेट्स पर गेम खेल रहे हैं। घर से बाहर दोस्तों के साथ खेलना बिलकुल बंद हो चुका है। इस कारण उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। अनिद्रा की परेशानी हो रही है।
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बचाव के लिए ये उपाय करें
- माता-पिता अपने बच्चों की क्षमता की पहचानें।
- अभिभावक उन पर पढ़ाई का अनावश्यक बोझ न डालें।
- बच्चों को पौष्टिक खाना खिलाने पर जोर दें। जंक फूड कम से कम दें।
- बच्चों में सुबह टहलने और योग करने की आदत डालें।
- रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालें।
- अधिक परेशानी होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
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