अपने पॉली हाउस में शिमला मिर्च की फसल देखते किसान प्रबल प्रताप सिंह।
मैनपुरी। तेजी से बढ़ती लागत और कम होती आमदनी के कारण जब परंपरागत खेती किसानों के लिए कम आकर्षक साबित हो रही है, ऐसे में एक युवा किसान ने आधुनिक खेती का दामन थामकर न सिर्फ अपनी किस्मत बदली है, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं। बेवर क्षेत्र के गांव रामपुर निवासी प्रबल प्रताप सिंह अपने पॉली हाउस में विभिन्न किस्म की लाल और पीली शिमला मिर्च उगाकर हर साल 9 से 10 लाख रुपये का सालाना मुनाफा कमा रहे हैं।प्रबल प्रताप सिंह ने 2019 में बेवर के खांकेताल के पास एक एकड़ में पॉली हाउस का निर्माण किया। नियंत्रित वातावरण वाला ढांचा उन्हें ऐसी फसलें उगाने में मदद करता है, जिनके लिए विशेष तापमान और परिस्थितियां आवश्यक होती हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ के पॉली हाउस में करीब 11 हजार रंगीन शिमला मिर्च के पौधे लगाए जाते हैं। इन पौधों से औसतन 2 किलो प्रति पौधा उत्पादन मिलता है, जिससे कुल मिलाकर लगभग 15 टन शिमला मिर्च का उत्पादन होता है।प्रबल के मुताबिक एक एकड़ में शिमला मिर्च की खेती का औसत खर्च 5 लाख रुपये आता है। लेकिन, उनकी शिमला मिर्च 90 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है, जिससे उन्हें हर साल 9 से 10 लाख रुपये की शानदार आमदनी होती है।प्रबल बताते हैं कि उनके पॉली हाउस में उगने वाली लाल और पीली शिमला मिर्च की महानगरों में खूब मांग है। यह सिर्फ देश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली की आजादनगर मंडी के जरिए शिमला मिर्च की खेप विदेशों तक भेजी जाती है। इसके अलावा, देश के कई पांच सितारा होटलों में भी वेंडरों के माध्यम से उनकी शिमला मिर्च पहुंचती है।शिमला मिर्च की खेती में तापमान का नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। किसान प्रबल प्रताप ने बताया कि विभिन्न किस्म की रंगीन शिमला मिर्च उगाने के लिए पॉली हाउस का तापमान नियंत्रित रखना पड़ता है। अच्छी फसल के लिए पॉली हाउस का तापमान 10 से 30 डिग्री सेल्सियस तक नियंत्रित रखना आवश्यक होता है। तापमान में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।मैनपुरी के जिला उद्यान अधिकारी अनूप कुमार चतुर्वेदी ने भी प्रबल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, जनपद में रंगीन शिमला मिर्च की खेती हो रही है। कम लागत और अच्छा मुनाफा होने के कारण प्रगतिशील किसान पॉली हाउस में शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं। कम लागत के कारण अब युवा किसानों का रुझान तेजी से इसकी ओर बढ़ रहा है, जो किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। प्रबल प्रताप सिंह की कहानी उन सभी किसानों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है जो पारंपरिक खेती की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने दिखाया है कि कैसे सही योजना, आधुनिक तकनीक और कड़ी मेहनत से खेती को भी एक बेहद सफल और मुनाफे वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है।