फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: ई-रजिस्ट्री का आदेश वापस, फिर भी नहीं टूटी हड़ताल; 15वें दिन भी तहसील में कामकाज ठप

Tue, 30 Jun 2026 09:26 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

सरकार ने ई-रजिस्ट्रेशन संबंधी विवादित आदेश वापस ले लिया, लेकिन नई नियमावली में अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स की भूमिका स्पष्ट न होने से सदर तहसील में 15वें दिन भी हड़ताल जारी रही। उधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच ने सरकार के फैसले को अधिवक्ता समाज की जीत बताते हुए इसका स्वागत किया।
विज्ञापन
ई रजिस्ट्री वापस होने पर एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताते अधिवक्ता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ई-रजिस्ट्रेशन और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था लागू करने वाला 4 जून, 2026 का आदेश वापस लिए जाने के बाद भी सदर तहसील में हड़ताल खत्म नहीं हो सकी। एआईजी स्टांप ने धरनास्थल पर आदेश वापसी का आधिकारिक पत्र सौंपा, लेकिन नई ई-पंजीकरण नियमावली में अधिवक्ताओं व डीड राइटर्स की भूमिका स्पष्ट न होने के कारण कार्य बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
विज्ञापन


तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभूनाथ वर्मा और महासचिव अरविंद कुमार दुबे के नेतृत्व में वकीलों ने धरनास्थल पर सुंदरकांड का पाठ किया। कुछ वकीलों का कहना है कि 2 अगस्त, 2024 को लागू किए गए सरकारी गजट में अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक संघ की सहभागिता नहीं दर्शाई गई है। मंगलवार को भी न्यायिक कार्य एवं उप निबंधक कार्यालय में कोई निबंधन संबंधी कार्य नहीं हुआ।

शासन को भेजा प्रत्यावेदन
महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय की ओर से प्रमुख सचिव (स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन) को भेजे गए पत्र के अनुसार, 29 जून 2026 को संघर्ष समिति और बार एसोसिएशन के साथ हुई वार्ता के बाद 4 जून का विवादित आदेश वापस ले लिया गया है। इसके अलावा अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगों को विचारार्थ शासन को भेजा गया है।
विज्ञापन


प्रमुख मांगें जो शासन को भेजी गईं
- उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024 की धारा-2, 4, 5 और 11 के उन खंडों को हटाना जो रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 में असंगत हैं।
- नियमावली में अधिवक्ताओं एवं दस्तावेज लेखकों की भूमिका स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाए।
- निबन्धन मित्र भर्ती संबंधी आदेश को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।

गुटबाजी हावी, फरियादी परेशान
ई रजिस्ट्री आदेश वापसी के बाद सदर तहसील में वकीलों की गुटबाजी मंगलवार को धरनास्थल पर सामने आई। अधिकांश वकील, कातिब, स्टांप वेंडर और टाइपिस्ट हड़ताल खत्म के पक्ष में नजर आए, जबकि कुछ वकीलों ने विरोध किया। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। रजिस्ट्री, विवाह पंजीकरण से लेकर मुकदमों की पैरवी तक ठप होने से लोग 15 दिनों से परेशान हैं। एआईजी स्टांप का कहना है कि कार्यालय खुले हुए हैं। रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है।


जनमंच ने बताया अधिवक्ता समाज की जीत
उत्तर प्रदेश सरकार ने तहसीलों में लागू की गई ई-रजिस्ट्री (सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल) व्यवस्था को वापस ले लिया है। मंगलवार को दीवानी परिसर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच के अधिवक्ताओं ने फैसले का स्वागत किया है। मिठाई बांटकर खुशी मनाई।

जनमंच के अध्यक्ष चौधरी अजय सिंह ने बताया कि व्यवस्था लागू होने के बाद से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच और अधिवक्ताओं द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा था। आंदोलनों के कारण सरकार को झुकना पड़ा। ई-रजिस्ट्री से सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा था। आदेश वापस लिए जाने से अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल है। इस दौरान दुर्ग विजय सिंह, हरदयाल सिंह, सुरेंद्र लाखन और उदय वीर सिंह व अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे। 

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें