कासगंज। जिले में ऑनलाइन ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। डाई कंपनी ने एप के माध्यम से लोगों को अपना शिकार बना लिया। कंपनी पांच सौ से अधिक लोगों की करोड़ों रुपये की गाढ़ी कमाई लेकर भाग गई है। साइबर सेल ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं स्थानीय स्तर पर बनाए गए कंपनी के एजेंट्स भी अपना मुंह छिपाते फिर रहे हैं।अमेरिकी कंपनी डाई ने जिले भर के लोगों को चेन सिस्टम के माध्यम से अच्छा मुनाफा देने का लालच दिया। इसके लिए कंपनी ने एक लिंक प्रोवाइड कराया। इस लिंक के माध्यम से शुरू में जब कुछ लोग जुड़े और उनके पास धन आना शुरू हो गया तो निवेशकों की संख्या बढ़ती गई। लोगों ने लाखों रुपये तक कंपनी में निवेश कर दिया। दो दिन पहले अचानक एप से पैसे आना बंद हो गए तो लोगों में खलबली मच गई। यह बात लोगों के बीच फैली तो काफी संख्या में लोग एकत्रित होकर एसपी के पास पहुंचे। एसपी से मामले की शिकायत करते हुए तहरीर दी गई। एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामले को साइबर सेल को सौंप दिया और प्राथमिकी दर्ज कर जांच के आदेश दिए। एसपी के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
अधिवक्ताओं ने ही बनाया अधिवक्ताओं को ठगी का शिकार : डाई एप के माध्यम से कंपनी के एजेंट बने अधिवक्ताओं ने ही अन्य अधिवक्ताओं को ठगी का शिकार बनाया। अधिवक्ता राहुल शर्मा, सर्वेश कुमार गुप्ता, अभिषेक चौहान, विश्व नाथ प्रताप सिंह एवं एक अन्य स्वरूप मोहंती ने अधिवक्ताओं को इस स्कीम के बारे में बताया। साथी अधिवक्ता की बातों में आकर जनपद न्यायालय के अधिवक्ता व न्यायालय के कर्मी ठगी का शिकार हो गए। अधिवक्ताओं ने आरोपी अधिवक्ताओं को नामजद करते हुए एसपी को तहरीर दी।
शहर की चोला गली के लोगों से भी हुई ठगी :
डाई एप से शहर की चोला गली के लोग भी ठगी का शिकार हुए हैं। इस गली के दो दर्जन लोगों से ठगी की गई है। गौरव माहेश्वरी ने बताया कि इस गली के लोगों से 10 लाख से अधिक की ठगी का अनुमान है। इसके अलावा यादव नगर, बोहरान गली, मोहल्ला जय जयराम सहित अन्य क्षेत्रों के लोग भी ठगी का शिकार हुए हैं।
छह दिन पहले की थी बैठक : अधिवक्ता राहुल शर्मा के माध्यम से डाई ऑनलाइन कंपनी ने छह दिन पूर्व श्रीमती गंगा देवी माहेश्वरी भवन में बैठक का आयोजन किया था। इस बैठक में लोगों को सोशल मीडिया पर लिंक शेयर कर एप डाउनलोड कराया गया। इसके बाद लोगों ने अपना धन निवेश किया। पहले से जुड़े सदस्यों को लिफाफे में रखकर धन का वितरण भी किया गया।