डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में एक और खेल हो गया है। बीते सेशन में ब्लैक लिस्टेट किए गए 56 कालेज में 48 को क्लीनचिट दे दी गई है। इन्हें नकल केचलते ब्लैकलिस्ट में रखा गया था। इस खेल में ं विश्वविद्यालय प्रशासन से लेकर औटा (आगरा विश्वविद्यालय शिक्षक संघ) सदस्य तक शामिल बताए गए हैं। इतना ही नहीं। इनमें से अधिकांश कालेजों को 2015-16 की परीक्षा में सेंटर बनाने की तैयारी भी की जा रही है।
2014-15 की मुख्य परीक्षा में सामूहिक नकल पर 56 कालेज डिबार कर दिए थे। इनके नकल वाले संबंधित पेपर की परीक्षा निरस्त कर पुन: कराने और तीन साल तक इन्हें सेंटर न बनाने पर निर्णय हुआ। इन कालेजों की जांच विश्वविद्यालय की यूएफएम (नकल मामलों की जांच करने वाली) कमेटी को सौंपी गई। सूत्र बताते हैं कि जांच में 26 कालेजों को आरोपों से बरी कर दिया गया। बाकी 30 पर कार्रवाई की संस्तुति कर विश्वविद्यालय प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी।
मौका बनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 22 कालेजों को अभयदान दे दिया। बचे आठ कालेजों की कार्रवाई के लिए दो सदस्यीय व्यक्तिगत यूएफएम कमेटी के पास भेजा गया। इसमें दागी 48 कालेजों को बरी देख कमेटी दंग रह गई। कमेटी ने रिपोर्ट में लिखा है कि सभी कालेजों पर समान आरोप हैं और सजा सिर्फ आठ को। ऐसे में सभी पर कार्रवाई वाजिब है, या फिर इन्हें भी क्लीन चिट दे दी जाए। बंद लिफाफे में ये रिपोर्ट कमेटी ने शुक्रवार को कुलपति सचिवालय भेज दी है।
परीक्षा नियंत्रक केएन सिंह का कहना है कि मामले की अभी जांच चल रही है। किसी कालेज को छूट देने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। औटा अध्यक्ष डा. वीरेंद्र चौहान सांठगांठ के खेल में ओटा का कोई सदस्य शामिल नहीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मिलकर दागी कालेजों को बचाया है। इसमें तगड़ी सांठगांठ की बू आ रही है। कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल का कहना है कि अभी तक ऐसी रिपोर्ट नहीं मिली है।
भरवा दिए गए परीक्षा फार्म
दूसरे सेशन की परीक्षा 11 मार्च से होनी है। ऐसे में बीते सेशन के 56 कालेजों की निरस्त परीक्षा अभी तक नहीं हुई है। यहां तक कि सूत्र बताते हैं कि इनमें से अधिकांश कालेजों के छात्रों के परीक्षा फार्म भी भरवा दिए हैं।