घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं छह-छह महीने से न्याय के लिए भटक रही हैं। पुलिस थानों से लेकर कलक्ट्रेट, एसएसपी कार्यालय व राज्य महिला आयोग से गुहार लगाने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही। ये हाल तब है जब सरकार के एजेंडे में महिला सुरक्षा सबसे ऊपर है।
मिशन शक्ति बंद होने के बाद फिर घरेल हिंसा बढ़ गई है। पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा। कोई दहेज उत्पीड़न की शिकार है, तो कहीं पति-पत्नी के बीच में वो आ गई है। कहीं ससुराल पक्ष ने बहू को घर से निकाल दिया है, तो कहीं बहू पर सास से मारपीट के आरोप हैं। प्रशासनिक व्यवस्था महिला सुरक्षा और उनके प्रति संवेदनशील नजर नहीं आती। राज्य महिला आयोग की सुनवाई हर माह होती है। जिसमें पुलिस व अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं। परंतु शिकायतों का गंभीरता से निस्तारण नहीं होता। महिलाओं के प्रति महिला पुलिस के व्यवहार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुलह कराने की कोशिश
जनसुनवाई में हमारी कोशिश सुलह कराने की होती है। महिला पुलिस थाने की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हूं। कल फिर सुनवाई मैं इन मामलों की समीक्षा होगी। - निर्मला दीक्षित, सदस्य, राज्य महिला आयोग
सुनवाई आज
बुधवार को सर्किट हाउस में महिला उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई राज्य महिला आयोग सदस्य करेंगी। जिसमें पहली बार विधिक प्राधिकरण टीम भी शामिल होगी।
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