घिरोर। सीएचसी गोधना का हाल बेहाल है। बुधवार को यहां दोपहर डेढ़ बजे तक डॉक्टर का पता नहीं था। फार्मासिस्ट भी कमरे से नदारद थे। काफी देर तक जब कोई नहीं आया तो इंतजार कर रहे मरीजों को प्रशिक्षु फार्मासिस्टों ने अपनी मर्जी से ही दवाएं बांट दीं।
सीएचसी गोधना पर पांच चिकित्सकों की तैनाती है। चिकित्साधीक्षक डॉ. प्रवीन यादव की देखरेख में यहां की सभी व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। बुधवार को सुबह 8 बजे अस्पताल तो खुल गया लेकिन दोपहर डेढ़ बजे तक भी न तो डॉक्टर आए और न ही फार्मासिस्ट। मरीज यहां वहां दवा लेने के लिए भटक रहे थे। फार्मासिस्ट के कमरे में कुछ प्रशिक्षु फार्मासिस्ट मौजूद थे, वे स्टाफ के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकी। हाथ में पर्चा लिए जब लोग परेशान होने लगे तो उन्हें प्रशिक्षु फार्मासिस्टों ने ही कुछ दवाएं दे दीं।
यहां मौजूद गोधना निवासी मीना देवी ने बताया कि वह एआरवी लगवाने आई थीं, लेकिन यहां कोई सुनने वाला नहीं है। इसी तरह सुजाता और सूरजमुखी निवासी नगला फूलसहाय खांसी और जुकाम की दवा लेने आई थीं। कई मरीज घंटों तक यहां इंतजार करते रहे। बाद में सभी को कुछ गोलियां देकर ही विदा कर दिया गया।
गलत दवा होने पर कौन होगा जिम्मेदार
बिना चिकित्सक की सलाह के ही दवाएं दी गई थीं, इसकी गवाही खाली पर्चा बखूबी दे रहा था। वहीं सवाल ये है कि अगर ये दवाएं बीमारी के अनुसार सही साबित नहीं होती हैं और कोई रिएक्शन हो जाता है तो कौन जिम्मेदार होगा। सीएचसी गोधना की ये तस्वीर व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए काफी है।