कासगंज। जिले का गठन होने के 16 साल बाद भी जिला पंचायत कासगंज के भू अभिलेख की पत्रावलियां ''लापता'''' हैं। यह सभी पत्रावलियां एटा जिला पंचायत में रखी गईं हैं। पत्राचार करने के बाद भी जिला पंचायत एटा की तरफ से कासगंज जिले को पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। पत्रावली न होने के कारण जिला पंचायत चाह कर भी अपनी भूमि का चिह्नांकन नहीं कर पा रही।
कासगंज जिले का गठन वर्ष 2008 में कांशीराम नगर के नाम से किया गया था। जिले की घोषणा से पूर्व कासगंज व पटियाली तहसील एटा जिले में हुआ करती थी। जिला घोषित होने के बाद सहावर को नई तहसील घोषित कर क्षेत्र को विकसित करने का प्रयास किया गया। जिला पंचायत की परिसंपत्तियों के अभिलेख, होटलों की जमीनों, जिला पंचायत कासगंज के क्षेत्र की भूमि, भवन, दुकान का रख रखाव एटा जिला पंचायत में होता था। कासगंज जिले की घोषणा के बाद संबंधित पत्रावलियों केा जिला पंचायत को भेजा जाना था। ताकि जिला पंचायत कासगंज को अपनी संपत्तियों की जानकारी सके।
16 वर्ष बीत जाने के बाद भी एटा जिला पंचायत से परिसंपत्तियों के अभिलेख जिले में नहीं पहुंचे। जिला पंचायत को अपनी भूमि के चिह्नित करने में दिक्कतें हो रही हैं। इससे भूमि का स्वामित्व नहीं हो पा रहा है। जिला पंचायत की भूमि पर कब्जे या विवाद के बारे में सही जानकारी नहीं हो पाती है। कब्जे या विवाद की स्थिति उत्पन्न होना स्वाभाविक है। इस संबंध में जिला पंचायत के पास अपने स्वामित्व के अभिलेख न होने के कारण स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही। इससे काम-काज में दिक्कतें आ रही है। कई बार विभाग ने पत्र भेजकर अभिलेख की मांग किया है। लेकिन अभी तक विभाग ने एटा से अभिलेख भेजने में रूचि नहीं दिखाई।
एटा से नहीं आ सकी हैं यह पत्रावलियां
- कासगंज की 17 पत्रावली दुकानों की लंबित है
- सोराेंजी की 06 पत्रावलियां दुकानों की लंबित है
- पटियाली में 01 एक पत्रावली डाक बंगला लंबित है
एटा जिला पंचायत ने कासगंज जिले का गठन के होने के 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी परिसंपत्ति के अभिलेख नहीं भेजे है। इससे भूमि का चिह्नांकन करने में दिक्कतें होती है। कई बार पत्र भेजकर अभिलेख मांगे गए है, लेकिन विभाग ने अभी तक अभिलेख नहीं भेजे हैं।- महावीर सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, कासगंज।