मैनपुरी में करंट लगने से पत्नी की मौत के बाद पति द्वारा दायर की गई याचिका पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पीड़ित को मुआवजे के रूप में 1.40 लाख रुपया मुआवजा अदा करने के आदेश अधिशासी अभियंता द्वितीय विद्युत को दिया है। एक महीने के अंदर धनराशि नहीं देने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
यहां का है मामला
थाना एलाऊ के नगला ध्यान निवासी असगरी बेगम 27 अगस्त 2015 को मकान के ऊपर से गुजरी विद्युत लाइन का तार टूटने से करंट की चपेट में आ गई थी। आगरा में चले उपचार के दौरान उनका बायां हाथ 28 अगस्त 2015 को काट दिया गया। 24 सितंबर को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। असगरी के पति इंसान अली ने औपचारिकताएं पूरी करके मुआवजा दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में याचिका दायर की थी।
बिजली विभाग ने भी रखा अपना पक्ष
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में इंसान अली ने उपचार के संबंध में प्रमाण और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। बिजली विभाग ने आयोग में अपना पक्ष रखा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुलश्रेष्ठ, सदस्य देवेंद्र गुप्ता, नीतिका दास ने दोनों पक्षों को सुना। आयोग द्वारा सुनाए गए निर्णय में कहा गया कि अधिशासी अभियंता द्वितीय विद्युत इंसान अली को 1.40 लाख रुपया मुआवजा के रूप में अदा करें। एक महीने में धनराशि नहीं देने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
एक लाख रुपये का दिया था चेक
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में इंसान अली ने कहा कि उसकी पत्नी के इलाज में पांच लाख रुपया खर्चा हुआ था। बिजली विभाग ने फरवरी 2016 में एक लाख रुपये का चेक दिया था। उसके आवेदन पर विभाग ने कोई विचार नहीं किया। उसने विभाग से और अधिक मुआवजा दिलाने की मांग की थी। जिस पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पीड़ित को 1.40 लाख रुपया मुआवजा देने का आदेश बिजली विभाग को दिया है।