सोरोंजी क्षेत्र में गंदगी व मलबे से अटा पड़ा नाला ।
सोरोंजी। बूढ़ी गंगा की धारा गंदगी और शिल्ट से बंद पड़ी है। इस बार बारिश का पानी भी बूढ़ी गंगा की धारा में नजर नहीं आ रहा। क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से गंदगी और सिल्ट हटवाकर इसे पानी का नियमित प्रवाह सुचारू बनाए रखने की मांग की है। दरअसल, प्राचीन काल में बूढ़ी गंगा तीर्थनगरी के कुम्हरौआ से फर्रुखाबाद के कंपिल तक बहती थी। सोरों, सहावर, पटियाली, फर्रुखाबाद के 70 गांवों से होकर 118 किमी. क्षेत्र में बहने वाली बूढ़ी गंगा से हजारों किसान लाभान्वित होते थे। वर्ष 2019 में बूढ़ी गंगा के पुनरोद्धार के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी सीपी सिंह ने जन समुदाय के श्रमदान से सफाई, खुदाई और पानी लाने का अभियान चलाया। जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता, भूजल स्तर बेहतर बनाने, किसानों की उन्नति के कार्य में मदद मिल सके। हालांकि अलीगढ़-कासगंज की सीमा पर स्थित बूढ़ी गंगा के बहाव क्षेत्र में आने वाले गांवों में अलीगढ़ प्रशासन की बेरुखी के चलते खुदाई सफाई का कार्य नहीं होने से बूढ़ी गंगा के जीर्णोद्धार की योजना दम तोड़ गई। अतरौली विकास खंड के सिकंदरपुर में सांकरा गंगा घाट से बूढ़ी गंगा में जाने वाला पानी फाटक बंद कर रोक दिया गया है। बीते 50 वर्षों से बूढ़ी गंगा में पानी नहीं आने से अब यह विलुप्त प्राय: हो चुकी है। जगह-जगह कस्बे व गांवों में बूढ़ी गंगा के बहाव क्षेत्र का लोगों ने अतिक्रमण कर मलबा व कूड़ा डालकर पाट दिया है। संत तुलसीदास नगर विकास समिति के अध्यक्ष डा. प्रभाकर पाराशरी, श्रीकांत तिवारी, मानसिंह कुशवाह, मनोज गुप्ता, शांत कुमार माहेश्वरी आदि ने जिला प्रशासन से बूढ़ी गंगा के बहाव के अवरोधों को हटवाकर बूढ़ी गंगा में जल लाने की मांग की है।