सोरोंजी। वसंत पंचमी पर बुधवार को भगवान वराह मंदिर में उत्सव मनाया गया। क्षेत्राधीश भगवान वराह अपने भक्तों के संग गुलाल व पुष्पों से होली खेले। वहीं महिला श्रद्धालुओं ने ढोलक व मंजीरे की थाप पर वसंत आगमन के गीत वराह भगवान को निवेदित किए। मंदिर के सेवायत पंडित नरेश त्रिगुणायत ने सुबह भगवान की मंगला आरती कर पंचाभिषेक किया। वसंती वस्त्र आभूषणों में सजाकर भगवान वराह की श्रृंगार सेवा के अंतर्गत गुलाल अर्पित किया गया।हुरियारे स्वरूप में दिव्य दर्शन दे रहे भगवान वराह को पंच मेवा युक्त केसरिया मोहन भोग का विशेष भोग लगाया गया। भगवान वराह को गेंदा गुलाब के सुगंधित फूलों की माला धारण कराई गई। महिला श्रद्धालुओं ने प्रभु वराह को वसंत आगमन के पद सुनाए। आई वसंत बहार भौंरा फूलन पे मंडराए, आई आई रे वसंत बहार, आओ स्वागत है ऋतुराज वसंत आदि लोकगीत ढोलक की थाप और मंजीरे की धुन के बीच गाए , महिलाएं नृत्य कर पर्व की खुशी व्यक्त कर रहीं थीं। मंदिर परिसर सुगंधित पुष्पों, रंग-बिरंगे गुब्बारे व कपड़ों से सजाया गया और सुगंधित इत्र का छिड़काव किया गया। सुबह 11 बजते ही मंदिर परिसर में फूलों की होली खेली गई। इसके बाद गर्भगृह से श्रद्धालुओं पर सेवायतों ने जैसे ही अबीर-गुलाल से भरी पिचकारी मारी, वसंत के बजते गीतों की धुन पर झूमते हुए श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गुलाल की वर्षा करने लगे। स्नेह से सभी एक-दूसरे के गालों पर गुलाल लगाकर वसंत ऋतु की बधाई देने लगे। भगवान वराह के मस्तक, गालों पर भी लाल गुलाल के बिंदे लगाकर वसंत ऋतु की बधाई दी गई। सेवायतों द्वारा भक्तों को मीठे पान प्रसाद स्वरूप दिए गए। तीर्थनगरी के रघुनाथ जी, द्वारिकाधीश, राधा कृष्ण मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने होली खेलकर वसंत ऋतु पर्व मनाया।