तीर्थनगरी में अब होली के रंग गहरे होते जा रहे हैं। कहीं ठाकुर जी के गालों पर गुलाल लग रहा है तो किसी मंदिर में भक्तों पर गुलाल उड़ाया जा रहा है। पद गायन की परंपरा तो अनेक आश्रम और मंदिरों में माहौल को होलीमय बना रही है। इससे श्रद्धालु आनंदित हो रहे हैं।
वसंत पंचमी को भक्तों के साथ गुलाल से होली खेलने के बाद अब श्रीबांकेबिहारी सिर्फ गालों पर ही गुलाल लगवा रहे हैं। भक्त भी प्रात:काल दर्शन के दौरान ठाकुर जी के गालों पर गुलाल लगता देख आनंदित हो जाते हैं। यही स्थिति निकटवर्ती मंदिर श्री राधासनेह बिहारी में है।
यहां भी प्रतिदिन ठाकुर जी के गालों पर गुलाल लगाया जा रहा है। उसी गुलाल को दिन भर यहां दर्शन को पहुंचने वाले भक्तों के माथे पर लगाया जाता है। श्रीराधावल्लभ मंदिर में मंगलवार को सेवायतों ने ठाकुर जी को गुलाल का फेंटा बांधा। इसके बाद भक्तों के साथ होली हुई।
भक्तों पर गुलाल उड़ाया गया। श्रीराधावल्लभ के समक्ष शरीर पर गुलाल पड़ते ही भक्त भी आनंदित हो जाते हैं। यहां होली के पदों का गायन भी हो रहा है। इसी के साथ होली के पदों का गायन अन्य मंदिर और आश्रम बढ़ने लगा है। टटिया स्थान और हिताश्रम पर होली के पद गायन किए जा रहे हैं।
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