कासगंज/ सोरोंजी। श्रावण मास के पहले दिन कांवड़ मेला शुरू हो गया है। एक दिन पूर्व गुरु पूर्णिमा का स्नान होने के साथ ही गंगाघाटों पर रौनक बन गई, लेकिन श्रावण मास के पहले दिन कांवड़ियों की टोलियों से गंगाघाटों पर रौनक थी। चारों ओर बम-बम भोले के जयकारे सुनाई दे रहे थे। केसरिया परिधान पहने शिवभक्ति के जोश में कांवड़िये डूबे हुए थे।
गंगाघाट पर मध्यप्रदेश के श्रद्धालुओं की कई टोलियां पहुंची। लहरा गंगाघाट पर गंगास्नान करने के बाद अपनी कांवड़ भर रहे हैं। लहरा मार्ग, तीर्थनगरी के बाजारों एवं कासगंज शहर के मार्गों पर कांवड़ियों की टोलियां बम-बम भोले के जयकारे लगाते हुए गंतव्य की ओर बढ़ती नजर आईं। गंगाघाटों पर कांवड़ियों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन व पुलिस की टीमें गंगाघाट पर मौजूद थीं। नगरपालिका प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी घाट पर नजर आए। तीर्थनगरी में कांवड़ मेले में लगी दुकानों से कांवड़ सजाने के समान की खरीददारी कर रहे हैं।
बड़ी संख्या में कांवडिय़ों के आने से दुकानदारों के चेहरे खिले नजर आए। भिंड, मुरैना, धौलपुर हिंडौन के अलावा मथुरा, आगरा जनपदों से बड़ी तादाद में कांवडि़ए मंगलवार को तीर्थंनगरी पहुंचे। कांवड़ियों ने हरि की पौड़ी में स्नान व वराह मंदिर में दर्शन के बाद अपने तीर्थपुरोहितों को दक्षिणा दी। इसके बाद कांवड़ की साज-सज्जा का सामान खरीदा। कांवड़, घुंघरू, घंटी, तस्वीरें, शीशा, माला, झालर, कपड़ा, गंगाजली, बेंत आदि सामान खरीदकर श्रद्धालु लहरा घाट पहुंचे।
जहां गंगा स्नान कर कांवड़ सजाई। कांच की गंगाजली में जल भरने के बाद कांवड़ का पूजन कर कांवड़ियों ने लहरेश्वर मंदिर में मत्था टेका। इसके बाद कांवड़ियों ने हरि की पौड़ी किनारे क्षेत्राधीश वराह मंदिर में दर्शन कर आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान किया। भगवा वस्त्र पहने कांवड़ियों के पैरों में बंधे घुंघरुओं की रुनझुन व मुख से गाए जा रहे लोकगीत, बम भोले के जयकारे माहौल को शिवमय बना रहे हैं।