डेंगू के डेन-2 स्ट्रेन पर पैरासीटामोल (पीसीएम) और फ्लूड (ग्लूकोज) का इस्तेमाल कारगर साबित हो रहा है। इलाज की इस गाइड लाइन से ताजनगरी समेत आसपास के जिलों के 75 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में 25 दिनों में 108 मरीज भर्ती हुए थे, जिसमें से फिरोजाबाद की एक बालिका की मौत हुई है।
बाल रोग विभाग में भर्ती हुए 36 में से 30 बच्चे ठीक हो चुके
एसएन के बाल रोग के डेंगू वार्ड प्रभारी डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि डेंगू के मरीजों के इलाज को सरकारी गाइड लाइन बनी है। इसी के तहत पैरासीटामोल और फ्लूड के इस्तेमाल से मरीजों का इलाज हो रहा है। जरूरत पर एक-दो एंटीबायोटिक भी इस्तेमाल कर रहे हैं। प्लान में दर्द निवारक दवाएं शामिल ही नहीं हैं, इनका उपयोग भी नहीं किया जा रहा है। सरकारी इलाज प्लान से ही बाल रोग विभाग में भर्ती हुए 36 में से 30 बच्चे ठीक हो चुके हैं, पांच का इलाज चल रहा है। फिरोजाबाद की एक बच्ची की मौत हुई है। बाल रोग विभाग के डॉ. नीरज यादव ने बताया कि डेंगू के मरीजों के इलाज में स्टेरॉयड दवाओं की कोई भूमिका नहीं हैं। झोलाछाप या फिर तेज बुखार कम करने के लिए स्टेरॉयड देने से ब्लीडिंग, संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है। बीपी अनियंत्रित होने से मरीज की हालत नाजुक बन जाती है।
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी और निजी अस्पतालों में आगरा समेत आसपास के जिलों के 14 अगस्त से 10 सितंबर तक 108 संदिग्ध और डेंगू के मरीज भर्ती हुए। इनमें से 75 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं, जिसमें एसएन से 57 और निजी अस्पतालों से 18 मरीज हैं।
स्टेरॉयड और दर्द निवारक दवाएं शामिल नहीं
एडी हेल्थ डॉ. एके सिंह ने बताया कि डेंगू के इलाज में स्टेरॉयड और दर्द निवारक दवाएं शामिल नहीं हैं और इनका इस्तेमाल नहीं किया जाए। फिरोजाबाद में कुछ मामलों में देखने मिला कि परिजनों ने झोलाछाप से बच्चों का इलाज कराया और स्टेरॉयड-दर्द निवारक दवाएं दी, जिससे बच्चे की हालत नाजुक हुई और मौत हुई। झोलाछाप को पकड़ने और उनके खिलाफ सीएमओ से कार्रवाई को निर्देशित भी किया है। स्टेरॉयड इस्तेमाल न करने के लिए गाइड लाइन भी जारी करने को कहा है।
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