पिता द्वारा छोड़े जाने के बाद एक बेटी ने पिता से शादी करने और भरण पोषण के लिए खर्चा मांगा है। प्रधान न्यायाधीश ने मामला समझौता कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सुलह एवं समझौता केंद्र में भेजा है। सुलह एवं समझौता केंद्र में सुनवाई के लिए दो जून की तारीख तय की गई है।
जिला एटा के थाना सकीट के गांव बहलोकपुर निवासी रनवीर सिंह पंजाब के गीहड़वाड़ा फरीदकोट में भारतीय खाद्य निगम में नौकरी करते हैं। इससे पहले वह भारतीय खाद्य निगम एटा में नौकरी करते थे। उनकी शादी 29 साल पहले रीता देवी निवासी नगला केहरी थाना घिरोर के साथ हुई थी। शादी के बाद उनके दो पुत्री करिश्मा और काजल, पुत्र आशीष हुए। वर्ष 2016 में रनवीर ने अपने परिवार को छोड़ दिया। रीता अपने बच्चों के साथ मायके में रहने लगी।
करिश्मा ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही है। उसने 27 जुलाई 2016 को प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय में अपने पिता से भरण पोषण के लिए हर महीने दस हजार रुपया और शादी करने के लिए एक मुश्त 15 लाख रुपये मांगे हैं। प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय गुलाम उल मदार ने मामला समझौता कराने के लिए सुलह एवं समझौता केंद्र में भेजा है। सुलह एवं समझौता केंद्र में सुनवाई के लिए दो जून की तारीख तय की गई है।
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पत्नी ने भी मांगा भरण पोषण रीता देवी ने भी अपने पति रनवीर सिंह ने अपने और दोनों बच्चे आशीष, काजल के लिए भरण पोषण मांगा है। प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय में दायर किए गए मुकदमे में रीता देवी ने तीनों के लिए हर महीने दस-दस हजार रुपये भरण पोषण के लिए अपने पति रनवीर सिंह से दिलाने की मांग की है। प्रधान न्यायाधीश ने रीता देवी का मुकदमा भी समझौता कराने के लिए सुलह एवं समझौता केंद्र में भेज दिया है। इस मुकदमे में भी दो जून की तारीख तय की गई है।