घटनास्थल पर एसएसपी अमित पाठक पूछताछ करते हुए
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हरिओम ने एसएसपी से शिकायत की। शनिवार को थाना दिवस में कागजात देखने के बाद लेखपाल भीमसेन, नरायन दत्त शर्मा, तोरा चौकी के दरोगा रोमित कुमार आर्य सहित तीन सिपाही और चालक गांव पहुंचे थे। लेखपाल ने पैमाइश शुरू कर दी।
इसके बाद तय हुआ कि 25 गज जमीन पर नवल सिंह का कब्जा रहेगा, जबकि बाकी जमीन से कब्जा मुक्त होगा। यह सुनने के बाद नवल सिंह पक्ष भड़क गए। उन्होंने घर के अंदर से फायरिंग कर दी। फायरिंग होते ही पुलिस कर्मी और लेखपाल जान बचाकर दूर भाग गए।
नवल सिंह पक्ष ने हरिओम के भाई राजवीर सिंह, भतीजे बृजेश (26), शेर सिंह, कृष्णकांत, संजू, भाभी मुन्नी देवी पर फावड़े, फरसे और बल्लम से हमला बोल दिया। बृजेश की बल्लम से प्रहार करके हत्या कर दी। वहीं अन्य को भी फरसे और फावड़े मारे।
हमले में घायल फौजी व अन्य परिजन
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सूचना पर क्षेत्र के तीनों थानों की पुलिस फोर्स पहुंच गई। एसएसपी अमित पाठक, एसपी सिटी प्रशांत वर्मा भी आ गए। पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल और एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी भेजा। वहीं नवल सिंह पक्ष के तकरीबन 12 लोगों को हिरासत में ले लिया।
12 नामजद के खिलाफ मुकदमा
सीओ सदर विकास जायसवाल ने बताया कि मामले में 12 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें नवल सिंह, मुकुंद सिंह, मुल्तान सिंह, ख्यालीराम उर्फ नरायन सिंह, रामनरेश, कमलेश कुमारी पत्नी हरीबाबू, गुड्डी देवी पत्नी नवल सिंह, राज बहादुर, नीरज, ब्रजेश, हरीबाबू को नामजद किया गया है।
वहीं मुकुल, रामनरेश, राजबहादुर और नवल सिंह पर हत्या का आरोप है, जबकि बाकी अन्य पर हमले का। उधर, एसएसपी ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। वहीं जमीन से नवल सिंह का कब्जा भी हटा दिया गया है।