शैलेंद्र केखिलाफ पहली रिपोर्ट दरोगा की पत्नी
ने दर्ज कराई थी। इसी पर उसे एक मई को गिरफ्तार किया गया । इसमें गबन और
धोखाधड़ी के साथ यह भी आरोप है कि शैलेंद्र ने कॉल स्पूफिंग के जरिए अफसरों
के फोन हैक करके उनके नंबरों से फोन किए। इसके बाद उसके खिलाफ 28 केस और
दर्ज हुए, लेकिन इनमें कॉल स्पूफिंक का जिक्र नहीं है।
पुलिस सूत्रों
ने बताया कि एसआईटी ने सबसे पहले वही केस खोला, जो पहले दर्ज कराया गया,
लेकिन इसमें अधिकारी फंसते नजर आने लगे। इसलिए इसकी जांच बंद करके इसके बाद
दर्ज केस खोल लिए गए। दरअसल, कॉल स्पूफिंग को साबित करने के लिए उन
अधिकारियों की कॉल डिटेल भी कोर्ट में रखनी पड़ेगी जिनके नाम से उसने फोन
किए।
अगर यह डिटेल रखी तो अधिकारियों से पूछताछ करना लाजिमी हो जाएगा
क्योंकि इसमें उनकी शैलेंद्र के साथ बातचीत के साक्ष्य हैं। इतना ही नहीं।
एसएमएस के रिकार्ड में तो ट्रांसफर और पोस्टिंग की बोली लगाए जाने का जिक्र
भी है। इसलिए एसआईटी ने तरकीब निकाली है कि पहले केस को ठंडे बस्ते में
डालकर बाद वाले मामलों में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। एसआईटी से जुड़े
सूत्रों ने बताया कि शैलेंद्र के खिलाफ पहले केस को छोड़कर बाकी में से कई
की चार्जशीट एकसाथ दाखिल की जाएगी। ये मुकदमे धोखाधडी़ और अमानत में खयानत
की धारा में दर्ज हुए थे।
हर मुकदमे में होगी जालसाजी की धारा
आगरा।
शैलेंद्र के खिलाफ 29 मुकदमों में एक में ही जालसाजी की धारा है, बाकी में
धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, जान से मारने की धमकी जैसे आरोप हैं। लेकिन अब
सभी में जालसाजी की धारा भी जोड़ी जाएगी। एसआईटी का कहना है कि उसने आलू
निर्यात का जो लाइसेंस दिखाया था, वह फर्जी पाया गया है। इसी आधार पर सभी
मुकदमों में धाराएं तरमीम की जा रही हैं।