अवैध यांत्रिक बूचड़खानों को बंद किए जाने के योगी सरकार के फैसले का असर शहर के दोनों में से किसी कमेले पर नहीं पड़ने जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई सिफ अवैध स्लाटर हाउस पर की जानी है। दोनों कमेलों को फिलहाल कोई दिक्कत नहीं आने जा रही हैं। हां, इनके अलावा अगर कहीं अवैध बूचड़खाना चलता पाया जाता है तो पहले की तरह अभियान चलाकर उन पर कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार के फैसले की खबर सुनते ही शहर के मांस कारोबारियों के दिल धक्क से रह गए थे। खबर यह थी कि यांत्रिक बूचड़खाने बंद किए जाएंगे। टेंशन नगर निगम के अफसरों को भी हो गई थी। इसके चलते शासन से संपर्क किया गया। वहां से साफ हो गया कि फैसला सिर्फ अवैध बूचड़खानों के खिलाफ है।
इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों ने साफ कर दिया कि इस फैसले का असर दोनों कमेलों पर नहीं पड़ने जा रहा है। बता दें, आगरा के कुबेरपुर में दो यांत्रिक स्लाटर हाउस संचालित हैं। एक नगर निगम की पशु वधशाला है, जो शहर में मीट की जरूरत को पूरा करती है। यहां प्रतिदिन करीब 150 पशु काटे जाने की अनुमति है। दूसरा स्लाटर हाउस पूर्व बसपा विधायक जुल्फिकार अहमद भुट्टो का है। यहां प्रतिदिन करीब 500 पशु काटने की अनुमति है। यहां से मीट एक्सपोर्ट किया जाता है।
फिलहाल यह स्लाटर हाउस 21 मार्च से बंद है। सिटी मजिस्ट्रेट संदीप गुप्ता के नेतृत्व में करीब 10 विभागों की टीम ने इस स्लाटर हाउस की जांच भी की थी लेकिन अभी तक डीएम को जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह आदेश उन यांत्रिक पशु वधशालाओं के लिए है जो सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। आगरा में संचालित दोनों स्लाटर हाउस की एक बार फिर से जांच होगी।
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शहर में मीट की खपत
पार्षद हाजी बिलाल के मुताबिक आगरा शहर में प्रतिदिन करीब 150 भैंस, 800-1000 हजार बकरे और करीब 20,000 से 25,000 मुर्गे कट जाते हैं। मछली की भी शहर में खपत होती है लेकिन मछली की बिक्री मौसम के हिसाब से कम ज्यादा होती रहती है। मीट शहर में आम दुकानों के अलावा होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट में भी सप्लाई होता है।
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शहर में संचालित हैं करीब 250 दुकानें
नगर निगम रिकार्ड के मुताबिक शहर में करीब 250 दुकानों को लाइसेंस दिया गया है। इसके अलावा सभी दुकानें अवैध रूप से संचालित थीं। यही हाल बूचड़खानों का था। शहर की गलियों में खुलेआम पशु कटान हो रहा था जो पिछले दिनों चले अभियान के दौरान बंद करा दिया गया है। करीब 15,000 से अधिक अवैध दुकानें बंद कराई गई हैं।
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ये हैं मानक
यांत्रिक पशु वधशालाओं को करीब 12 विभागों के मानकों को पूरा करना होता है। इनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों को अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट, रेंडिरंग प्लांट होना जरूरी है। साथ ही मृदा और जल प्रदूषण के मानक पूरे होने चाहिए। नगर निगम के तहत किसी भी स्लाटर हाउस में बीमार और दुधारू पशु को काटने पर प्रतिबंध है। साथ ही पशुओं के एंटी मार्टम और पोस्टमार्टम के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम का होना जरूरी है। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग, श्रम विभाग, वाणिज्य कर विभाग के मानकों को भी पूरा करना जरूरी है। स्लाटर हाउस में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए।
वर्जन
‘स्लाटर हाउस बंद हुए तो लोगों को मीट कहां से मिलेगा। कारोबारी बर्बाद हो ही जाएंगे। क्या फैसला हुआ है अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन यदि सरकार सभी स्लाटर हाउस बंद करने की बात कर रही है तो यह फैसला कभी भी न्याय संगत नहीं हो सकता है।’
हाजी विलाल, पार्षद नगर निगम
कैबिनेट की बैठक के संबंध में अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है लेकिन जो सुना है उसके मुताबिक ऐसी यांत्रिक पशु वधशालाएं बंद होंगी जो सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के मानकों को पूरा नहीं करती हैं। प्रदेश में ऐसी यांत्रिक पशु वधशालाएं बंद होंगी जिनके मानक पूरे नहीं होंगे।
डा. अजय सिंह, पशु चिकित्साधिकारी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि व्यक्ति फूड हैबिट के मुताबिक उसे खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना म्यूनिसिपल कमिश्नर का दायित्व है। इसके तहत नगर निगम को स्लाटर हाउस संचालित करना पड़ता है। नगर निगम का स्लाटर हाउस सभी मानकों को पूरा करता है। लिहाजा निगम के स्लाटर हाउस को बंद नहीं किया जा सकता है।
डा. योगेश शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी, नगर निगम
02 यांत्रिक पशु वधशाला हैं शहर में
250 वैध मीट की दुकानें शहर में
150 भैंस के मीट की प्रतिदिन खपत
800-1000 बकरे के मीट की रोजाना खपत
20,000-25,000 मुर्गों की है प्रतिदिन डिमांड
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घरों में चल रहे कमेले कराए जाएंगे बंद
अवैध बूचड़खानों पर सख्ती किए जाने के बाद ऐसी सूचनाएं आ रही हैं कि कई जगह घरों में पशु काटे जा रहे हैं। इनके ही मांस की सप्लाई होटलों और रेस्तरां को की जा रही है। नगर निगम और पुलिस ने इसकी खुफिया जांच करा ली है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इन पर जल्द ही छापामार कार्रवाई की जाएगी। ये कमेले यमुना पार में चल रहे हैं। साथ ही मंटोला में कुछ लोग चोरी छिपे घर पर पशु काट रहे हैं।