एसपीएस (सीवेज पंपिंग स्टेशन) टैंक हादसे के पीड़ितों से मिलने के लिए पुलिस की कड़ी सुरक्षा में एसएन मेडिकल कालेज पहुंचे जल निगम के अफसरों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। पीड़ित परिवार एसपीएस ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर अड़े थे, जबकि अफसरों ने उनके सामने पांच-पांच लाख लेकर समझौता कर लेने का प्रस्ताव रख दिया। इस पर गुस्से से भरे पीड़ित बोले, पांच नहीं, आप 10 लाख ले लो साहब, बस जहरीली गैस वाले टैंक में एक बार अपने बेटे को उतार दो।
इस पर अफसरों की बोलती बंद हो गई। इसके बाद कई घंटों तक भारी हंगामा होता रहा।
नगला बूढ़ी स्थित सीवेज पंपिंग स्टेशन के टैंक में जहरीली गैस मीथेन की भारी मात्रा की वजह से सोमवार शाम हुए इस हादसे के बाद तीनों मृतक जेई अंकित, सफाईकर्मी करन और सोनू के शव एसएन मेडिकल कालेज के पोस्टमार्टम हाउस ले जाए गए। मौके पर न तो जल निगम के अफसर पहुंचे थे और न ही एसपीएस का ठेकेदार। लोग इन्हें बुलाने की मांग कर रहे थे। अधिकारी देर रात एसएन पहुंचे।इनके कहने पर इन्हें पुलिस सुरक्षा घेरे में पीड़ितों के पास ले जाया गया। पीड़ितों ने बताया कि जल निगम के अफसरों का रवैया बड़ा ही शर्मनाक था। उन्होंने आते ही हादसे पर दुख जताने के बजाय पैसा लेकर समझौता करने का प्रस्ताव रखा। उन पर गुस्सा उतारने के बाद लोगों ने उनसे बात करने से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारी वार्ता करने लगे।
मुआवजा दिलाकर मुकदमे से बचे अफसर
पुलिस प्रशासन के अधिकारी किसी भी कीमत पर ठेकेदार और जल निगम के अफसरों को एफआईआर से बचाना चाहते थे। जबकि पीड़ित देर रात तक केस दर्ज कराने पर अड़े थे। काफी देर की बहस के बाद प्रशासन से कहा गया कि मृतक आश्रितों को 15-15 लाख मुआवजा और परिवार के एक -एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। प्रशासन ने जवाब दिया कि पांच-पांच लाख से ज्यादा नहीं दिला सकते। बाद में सहमति सात-सात लाख पर बनी।
जल निगम अधिकारियों ने पांच-पांच लाख के चेक मंगलवार सुबह प्रशासन को दे दिए। प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि चेक ठेकेदार से लिए गए हैं। दो-दो लाख सात दिन बाद देने के लिए कहा। शर्त यह रखी गई है कि कोई भी पीड़ित एफआईआर नहीं कराएगा। बेहोश हुए दीपक को उपचार के लिए 25 हजार कैश दिलाए गए हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि पीड़ितों को पेंशन और मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाने के लिए शासन को लिखा जाएगा। तीनों पीड़ित परिवारों को चेक दे दिए गए हैं। उधर, मृत सोनू के ताऊ महावीर सिंह ने बताया कि बातचीत के बाद यही सहमति बनी कि केस नहीं कराया जाएगा। मृतक करन के पिता महबूब का कहना था कि जब किसी ने केस दर्ज नहीं कराया, तो उन्होंने भी नहीं कराया।
करन की पत्नी और मां को चेक
मृतक करन के परिवार को ढाई-ढाई लाख के दो चेक दिए गए। एक उसकी पत्नी रानी के नाम है और दूसरा उसकी मां मंथरा के। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि ऐसा इसलिए कराया गया क्योंकि करन अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पूरा परिवार उसी पर आश्रित था। मृतक अंकित और सोनू के चेक उनकी पत्नी के नाम दिए गए हैं।
ठेकेदार पर मारपीट का आरोप
सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ हरीपर्वत के सामने पीड़ितों ने मारपीट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उसने मृतक करन की मां के हाथ पर डंडा मारा है। अधिकारियों ने जांच कराने का आश्वासन दिया।
सफाईकर्मी करन का शव देख घर में मचा कोहराम
किरावली। कस्वा के मोहल्ला पैठ गली निवासी करन (20) पुत्र महबू की सोमवार को आगरा में मौत के बाद मंगलवार दोपहर बाद शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। आसपास लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि करन ठेके पर जलनिगम में सफाई कर्मचारी थे। सोमवार शाम वह जेई व अन्य साथियों के साथ टैंक में सफाई करने उतरे थे। उसमें जहरीली गैस से तीनों की मौत हो गई थी। करन अपने पिता का इकलौता बेटा था। उनकी तीन बहनेें भी हैं। घर में उनकी पत्नी रानी समेत सभी परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।