जेल में बंद जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल की ठगी की एक और कारस्तानी सामने आई है। उसके खिलाफ दर्ज कराए गए 33वें मुकदमे में आरोप है कि उसने नगर निगम में नौकरी दिलाने के नाम पर भी जी भरकर ठगी की। वह खुद को दर्जा प्राप्त मंत्री के साथ मुख्यमंत्री का दोस्त बताता था।
यह एफआईआर पूजा मार्केट, स्टेट बैंक के सामने, बोदला निवासी रमेश चंद ने दर्ज कराई है। इसमें शैलेंद्र के अलावा उसके पिता मुरारी लाल, पत्नी वंदना अग्रवाल और दोस्त संजय उपाध्याय को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि संजय ने उन्हें शैलेंद्र से मिलवाया। शैलेंद्र ने कहा कि वह उनके चार भतीजों की नगर निगम में बाबू के पद पर नियुक्ति करा देगा। उसने कुल 12 लाख रुपये रिश्वत मांगी। उसकी पत्नी और उसके पिता ने भी यही कहा कि पैसा देने पर काम हो जाएगा। उन्होंने उसे रकम दे दी। उसने हाईस्कूल की मार्कशीट और 66 फोटो मांगे। उसने उसे अपने भतीजों रतनदीप, कुलदीप, अमरदीप और संदीप की भर्ती करानी थी।
यह बात पिछले साल सितंबर की है। इसके बाद शैलेंद्र एक नियुक्ति सूची खुद बनाई और दिखाकर कहा कि दो भतीजे आगरा और दो कानपुर के लिए नियुक्त हो गए हैं। थोड़े दिन बाद कहने लगा कि भर्ती पर रोक लग गई है। पैसा वापस मांगा तो दिया नहीं। बहुत जोर डालने पर सात लाख का बैंक ऑफ बड़ौदा का एक चेक दिया, जो कैश नहीं हुआ। इसके बाद संजय ने 12 लाख का चेक दिया। यह भी कैश नहीं हुआ। इसके बाद शैलेंद्र जेल गया और संजय घर छोड़कर भाग गया।
...तो 100 तक पहुंचेगा मुकदमोें का आंकड़ा
आगरा। शैलेंद्र अग्रवाल की जालसाजी के शिकार लोगों की संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है। लेकिन 100 ऐसे हैं, जो लगातार अधिकारियों के पास जाकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इनमें से अभी तक 33 ने केस दर्ज कराया है। लेकिन माना जा रहा है कि धीरे-धीरे सभी रिपोर्ट लिखवा देंगे। ये सभी लोग एक एक करके मुकदमे दर्ज करा रहे हैं।