हाईप्रोफाइल जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल की हिस्ट्रीशीट खोलकर उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भले ही कर दी गई हो, लेकिन अब भी उसे मदद पहुंचाने में पुलिस जरा भी कसर नहीं छोड़ रही है। करोड़ों की धोखाधड़ी में उसके साथ नामजद उसके परिवारीजनों और रिश्तेदारों के लिए तो पुलिस एक तरह से ढाल ही बन गई है।
इन लोगों को बगैर किसी जांच पड़ताल के ही 23 मामलों में क्लीन चिट दे दी गई है। इनके खिलाफ मौजूद साक्ष्य देखे तक नहीं जा रहे। प्रदेश भर में चर्चित इस मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स और शासन तक की भूमिका सवालों के घेरे में है। आरटीआई एक्टिविस्ट डा. नूतन ठाकुर ने इस केस की सीबीआई जांच कराने के लिए हाईकोर्ट में पीआईएल भी दायर कर रखी है जिस पर सुनवाई चल रही है।
इसके बावजूद अफसर नियम-कायदे ताक पर रखकर कहीं न कहीं सत्ता के दबाव में झुके नजर आ रहे हैं। शैलेंद्र के रिश्ते सपा के बड़े नेताओं से रहे हैं। इसी का असर माना जा रहा है कि पुलिस ने अपने रजिस्टर में 36 केस में आरोपी शैलेंद्र का गैंग बनाने के लिए उसके मैनेजर रोहन और ड्राइवर अमित को गैंग मेंबर बना लिया, लेकिन उसके साथ नामजद उसके परिवारीजन और रिश्तेदारों को साफ बचा दिया।
इनमें उसके पिता मुरारी लाल, भाई जितेंद्र और नितेंद्र, पत्नी वंदना, रिश्तेदार सतीश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल भी शामिल हैं। खुद बच जाने के बाद अब ये लोग एटा जेल में बंद शैलेंद्र की पैरवी में लगे हैं।
सवाल -1
शैलेंद्र के साथ मुकदमों में नामजद उसके परिवारीजन और रिश्तेदार गैंग के सदस्यों के रूप में क्यों चिह्नित नहीं किए गए ?
सवाल - 2
मुद्दई अपने बयान से नहीं पलटे हैं, फिर शैलेंद्र के साथ नामजद उसके परिवारीजनों को क्लीन चिट कैसे दे दी गई?
सवाल - 3
शैलेंद्र के जेल में रहते उससे मोबाइल फोन पर बात करने वाले उसके रिश्तेदारों से अभी तक पूछताछ क्यों नहीं की गई?
साक्ष्य -1
शैलेंद्र ने अपनी जिस फर्म एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड में निवेश के नाम पर 36 फीसदी ब्याज का लालच देकर करोड़ों की जालसाजी की, उसके डायरेक्टर में उसके अलावा उसके पिता मुरारीलाल अग्रवाल, भाई जितेंद्र अग्रवाल और भाई नितेंद्र अग्रवाल भी शामिल हैं।
साक्ष्य -2
केस दर्ज कराने वाले रवि बंसल, दीपक बंसल और घनश्याम का साफ कहना है कि वे आज भी अपने इस बयान पर कायम हैं कि शैलेंद्र की जालसाजी में उसके परिवार और रिश्तेदारों ने उसका पूरा साथ दिया। पुलिस उन्हें जांच किए बगैर ही बचा रही है।