आठ माह से मथुरा की जेल में बंद 17 बांग्लादेशियों को कोर्ट ने दो वर्ष छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में अधिकतर बांग्लादेश के डुमरिया, खुलना, फुलवारी और कुलीग्राम क्षेत्र के रहने वाले हैं।
सभी को एलआईयू ने हाईवे क्षेत्र के सराय आजमाबाद से पकड़ा था। पकड़े गए बांग्लादेशियों में पांच पुरुष तथा 12 महिलाएं शामिल हैं। वहीं जेल की सजा पाने वाली बांग्लादेशी महिलाओं के सात बच्चे भारतीय हो गए हैं।
देशभर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत मथुरा की एलआईयू शाखा ने 12 अप्रैल 2018 को हाईवे के गांव सराय आजमाबाद में अवैध रूप से रहे 17 बांग्लादेशियों को पकड़ा था।
एलआईयू निरीक्षक केपी कौशिक द्वारा इस संबंध में हाईवे थाने में 14 विदेशी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई और सभी को जेल भेज दिया गया। इस संबंध में एसीजेएम चतुर्थ अमित कुमार तिवारी की कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।
अभियोजन अधिकारी द्वारा केस में सात गवाहों को पेश किया गया। गवाही के आधार पर न्यायालय ने सोमवार को सभी बांग्लादेशियों को दो वर्ष 6 माह की सजा सुनाई है। सजा पाए बांग्लादेशियों में पांच पुरुष तथा 12 महिलाएं हैं।
सोमवार को निर्णय सुनाने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया। अभियोजन अधिकारी प्रशांत मिश्रा ने बताया कि केस में सात गवाहों को पेश किया गया था।
इन बांग्लादेशियों को मिली सजा
सजा पाने वाले बांग्लादेशियों में बिलाल हुसैन, समीम, शरीफ, आफताब, आरिफ, शरीफा, बुलबुली, पारू मुक्ता, तसलीम, रेनू, मीराना, रूपाली, रेशमा, नजमा, जमीना और शाहिनूर शामिल हैं।
बांग्लादेशियों के बच्चे हो गए भारतीय
अवैध रूप से भारत में रहने के कारण जेल की सजा पाने वाली बांग्लादेशी महिलाओं के सात बच्चे भारतीय हो गए हैं। इनका जन्म जेल के दौरान मथुरा में हुआ। इन्हें लेकर जेल प्रशासन कानूनी दाव पेंच में उलझा महसूस कर रहा है।
जनपद से बांग्लादेशियों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ऐसे में सात बांग्लादेशी दुधमुंहों ने देश की नागरिकता पाने का अधिकार भी प्राप्त कर लिया है। जेल में बंद बांग्लादेशी महिलाओं में से सात महिलाओं ने जेल में ही बच्चों को जन्म दे दिया है।
इन बच्चों का अस्पताल में रजिस्ट्रेशन तक है। देश में पैदा होने के आधार पर कानूनन इन बच्चों को देश की नागरिकता मिलने का अधिकार है। अब इन बच्चों को लेकर जेल प्रशासन पशोपेश में है, वो इनकी मां को बांग्लादेश भेजने से पहले कानूनी राय लेंगे।
जेलर अरविंद पांडे ने बताया कि वह इन्हें भेजने से पहले कानूनी राय लेंगे। उन्होंने बताया कि अभी कुछ और महिलाएं भी गर्भवती हैं। उनकी जेल के नियमों के अनुसार देखभाल की जा रही है। सजा पाई महिलाओं के साथ भी दो-तीन बच्चे हैं।