सपना अपनी बैरक से निकली और स्विच रूम तक पहुंच गई। उसे रोकने के लिए कोई बंदी रक्षक नहीं था। उसने दुपट्टे से फांसी का फंदा बनाया, तब भी उसे देखने वाला कोई नहीं था। वह इस पर लटककर मर गई, तब भी जेल प्रशासन को पता नहीं चला। मालूम चलता भी कैसे ? जब वहां कोई बंदी रक्षक अपनी ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं था। जेल सूत्रों की मानें तो उस समय बंदी रक्षक सो रहे थे।
उधर, सपना के ससुरालीजनों को इस पर यकीन ही नहीं है कि उसने सुसाइड कर लिया? सुबह छह बजे हुई घटना की सूचना उन्हें दोपहर दो बजे दी गई। उसके ससुर फूल सिंह बोले, उसका दिल तो पत्थर का था, वह आत्महत्या कैसे कर सकती है?
सास गुड्डी देवी का कहना था, जिसने इतनी बेरहमी से दस साल के बच्चे को मारा, वह अपनी जान ऐसे नहीं दे सकती। घटना की जांच होनी चाहिए। उसके पति रवि ने सिर्फ इतना कहा, मुझे इस घटना पर कुछ नहीं कहना है। लेकिन इसकी जांच होनी चाहिए।
मायके वालों ने आने से इंकार किया
सपना का मायका इटावा के नेवरपुर इकदिल गांव में है। उसके पति रवि ने बताया कि उसकी जेल में मृत्यु हो जाने की सूचना उसके पिता सुन्दर सिंह को दी गई। उन्होंने यह कहकर आने से इंकार कर दिया कि उनके लिए तो वह सोमवार को ही मर गई थी, जब उसने देवर के खून से हाथ रंगे थे।
दाह संस्कार तो करना ही पड़ेगा
सपना की मौत के बाद भी ससुराल पक्ष का उस पर गुस्सा कम नहीं हुआ है। पोस्टमार्टम गृह पर पहुंचे इन लोगों का कहना था कि उनके घर का नाश हो गया। रवि के मामा हरि सिंह ने कहा कि उसके मायके वाले नहीं आ रहे हैं। अब दाह संस्कार उन्हें ही करना होगा। रिश्ते के मामा पोहप सिंह का भी यही कहना था।
घटना में प्रधान बंदी रक्षक की लापरवाही सामने आई है। जांच कर ली गई है। कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी गई है। - संतलाल यादव ( वरिष्ठ, जेल अधीक्षक, जिला कारागार )