बता दें, दिल्ली की छात्रा तनीषा (बदला नाम) हरीपर्वत क्षेत्र के
इंस्टीट्यूट से एमएससी कर रही है। वह विशेष अनुमति पर एक हॉस्टल में रहती
है। शुक्रवार शाम को अपने दो सहपाठियों को नोट्स देकर लौट रही थी। रास्ते
में दो छात्रों ने उससे छेड़छाड़ की। शनिवार शाम को घरवालों ने थाना
हरीपर्वत में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद भी आरोपी गिरफ्तार नही हो सके
हैं। महिला शांति सेना की संरक्षक कुंदनिका शर्मा, अध्यक्ष वत्सला
प्रभाकर, शीला बहल, शांति देवी, ममता, नीलम सिंघल, रीता कपूर सहित 50-60
सदस्या सोमवार दोपहर तकरीबन 12 बजे थाना हरीपर्वत पहुंची। एसपी सिटी आफिस
में नारेबाजी की। एसपी के नहीं मिलने पर वे ऑफिस के गेट के बाहर ही धरना
देने लगीं। पौन घंटे बाद आफिस का गेट खोलकर महिलाओं को अंदर बैठाया गया।
इसके बाद एसीएम प्रथम पीडी गुप्ता पहुंचे। पदाधिकारियों ने उनसे कहा कि
आरोपी खुलेआम नहीं घूमने चाहिए। जल्द गिरफ्तार कर उन पर रासुका लगाई जाए।
अगर, ऐसा नहीं होता है तो वे प्रदर्शन करेंगी।
वहीं, पुलिस का कहना है
कि आरोपियों की तलाश की जा रही है। रविवार होने की वजह से आरोपियों के घर
का पता नहीं चल सका था। इसलिए सोमवार को फिर टीम पहुंची। पुलिस ने आरोपियों
के बारे में जानकारी हासिल की। कई स्थानों पर दबिश भी दी गई।
वर्जन
लड़कियों
के साथ हैवानियत की घटनाएं चिंता का विषय हैं। मां-बाप लड़कियों को जागरूक
करें। लड़कियां ग्रुप मेें जाएं, जिससे शोहदों का मुकाबला कर सकें। अगर,
उनके साथ कोई घटना होती है तो एकजुट होकर सड़क पर उतरें।
कुंदनिका शर्मा, संरक्षक, महिला शांति सेना
शोहदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे दूसरे ऐसी हरकत करने की हिम्मत नहीं जुटा सकें।
डा. शशि तिवारी, कवयित्री
72 घंटे में गिरफ्तारी नहीं तो आंदोलन
हिंदूवादी
संगठनों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर थाना हरीपर्वत में
प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि अगर 72 घंटे में गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे
आंदोलन करेंगे। बजरंग दल के दिग्विजय नाथ तिवारी ने बताया कि शोहदों की
धरपकड़ के लिए कालेजों के बाहर संगठन की ओर से अभियान चलाया जाएगा। अज्जू
चौहान, राजेंद्र गर्ग, धर्मेंद्र आसौलिया, सतेंद्र आदि मौजूद रहे।
मथुरा की बालिका को मिली मदद
मथुरा
के महावन में शराब के ठेके के पास खंडहर मकान में शनिवार रात को दरिंदगी
की गई थी। घायल बालिका को एसएन इमरजेेंसी लाया गया था। मगर, यहां पर इलाज
नहीं हो पाने के कारण घरवाले उसे निजी अस्पताल में ले गए। पीड़ित परिवार के
पास बेटी के इलाज के लिए रुपये भी नहीं है। सोमवार को महिला शांति सेना की
पदाधिकारी अस्पताल पहुंची। उन्होंने दवाओं का इंतजाम कराया।