आगरा की जिला कारागार से गुरुवार सुबह को दीवानी पेशी पर आया कैदी फरार हो गया। इसकी जानकारी शाम को बंदियों को जिला कारागार में दाखिल करने के दौरान की गई गिनती पर हो सकी। हैरानी की बात यही रही कि अभिरक्षा में लगे सिपाहियों को यही पता नहीं चला कि कैदी कब और कहां से फरार हुआ?
कागारौल निवासी कैदी असलम पुत्र असगर सामूहिक दुष्कर्म, एससी-एसटी एक्ट में 12 फरवरी को जेल में दाखिल कराया गया था। चार जुलाई को उसकी कोर्ट में पेशी होनी थी। जेल से अन्य बंदियों के साथ उसे दीवानी भेजा गया था।
पुलिस लाइन से पुलिसकर्मी बंदियों को लेकर गए थे। शाम को पुलिस बंदियों को जेल में दाखिल करने के लिए लाई थी। जब बंदियों की गिनती की गई तो असलम नहीं था। इस पर जेल प्रशासन ने पुलिस कर्मियों को जानकारी दी। मामला अधिकारियों तक पहुंच गया।
शाम आठ बजे हो सकती जानकारी
इसके बाद एसपी प्रोटोकाल एमपी सिंह थाना न्यू आगरा जांच के लिए पहुंच गए। उन्होंने जानकारी जुटाई। वहीं थाना न्यू आगरा पुलिस को बंदी के भागने की जानकारी रात आठ बजे हो सकी। देर रात यह पता नहीं चल पाया कि कैदी किस जगह से फरार हुआ है।
थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि बंदी कहां और कैसे भागा? इसकी जानकारी की जा रही है। उसे कोर्ट में पेश किया गया या नहीं? कोर्ट से दीवानी हवालात में दाखिल कराया गया या नहीं? इसकी जानकारी की जा रही है। यह भी पता नहीं चल सका है कि कौन सिपाही बंदी को लेकर गया।
हालांकि इसका पूरा ब्यौरा पुलिस के पास होता है। ऐसे मामलों में अभिरक्षा में लगे सिपाहियों के खिलाफ केस दर्ज किया जाता है। इस मामले में भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है। थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि बंदी के फरार होने की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
दो गाड़ियों में आए थे 107 बंदी
जिला कारागार से कोर्ट में पेश करने के लिए दो गाड़ियों से 107 बंदियों को लाया गया था। एक गाड़ी में 55 तो दूसरी में 52 बंदी थे। एक गाड़ी में 55 बंदी पूरे जिला जेल पहुंचे। वहीं दूसरी गाड़ी में चार नए आरोपी और थे। उन्हें भी दाखिल किया जाना था। मगर, उसमें असलम नहीं था। इस पर मामले की जानकारी हो सकी।
पुलिस लाइन से आते हैं कर्मी
जिला कारागार से बंदियों को लाने और दोबारा से कारागार में दाखिल कराने में पुलिस लाइन से फोर्स लगाई जाती हैं। इसमें दरोगा से लेकर सिपाही तक होते हैं। कोर्ट में पेशी के दौरान भी पुलिस लाइन के ही पुलिसकर्मी रहते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बंदी भाग कैसे गया?
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
दीवानी से बंदी भागने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। पुलिस कर्मियों पर मुकदमे भी लिखे जा चुके हैं। इसके अलावा एसएन मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल से भी बंदियों के भागने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।