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पुलिस का कठेरिया पर व्हाट्स एप से वार

Wed, 02 Dec 2015 01:51 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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आईजी आफिस पर 23 नवंबर की शाम हुए बवाल मामले में एक तरफ  भाजपा नेताओं ने पुलिस अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, तो दूसरी ओर पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद अब सोशल मीडिया को हथियार बना लिया है। पुलिस ने कई व्हाट्स एप ग्रुप पर घटनाक्रम का तीन मिनट कावीडियो डाल दिया जो देखते-देखते वायरल हो गया। इसमें केंद्रीय राज्यमंत्री डा. राम शंकर कठेरिया एक सिपाही को भगाने की बात कहते दिख रहे हैं। इसके तुरंत बाद ही बवाल शुरू हो जाता है। माना जा रहा है कि पुलिस इस वीडियो के जरिए संदेश देना चाहती है कि बवाल डा. कठेरिया की वजह से हुआ।
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दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने आईजी डीसी मिश्रा को निशाने पर ले रखा है। बवाल के लिए उनके बयान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उनका आरोप है कि  आईजी ने ज्ञापन लेने के बाद विधायक योगेंद्र उपाध्याय से कहा था,‘अब तो तुम्हारी राजनीतिक  खुराक पूरी हो गई।’ भाजपा नेताओं का दावा है कि आईजी के ऐसा कहने के बाद ही बवाल शुरू हुआ। भाजपाइयों ने इसके वीडियो साक्ष्य भी जुटाए हैं। शिकायत गृहमंत्री राजनाथ सिंह से करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि इसी की काट में पुलिस ने व्हाट्स एप से वार किया है।
वीडियो में विधायक योगेंद्र उपाध्याय आईजी के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक सिपाही अपने कैमरे में इसे कैद कर रहा है। कठेरिया को जैसे ही इसका पता चलता है, वे कहते हैं ओए... ओ... ओए... इसको भगाओ... सिपाही को बाहर करो। इसके बाद वीडियो बंद हो जाता है, सिर्फ ऑडियो रह जाता है, इसमें काफी शोर सुनाई दे रहा है।
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पुलिस ने हालांकि यह वीडियो अधिकारियों, थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्जों के साथ बनाए गए ग्रुप पर शेयर किया है पर यह आम लोगों की जानकारी में भी है। शहर में इस पर चर्चा हो रही है। अधिकारी इस बारे में कुछ कहने से बच रहे हैं।
अब तक बयान दर्ज नहीं
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आईजी दफ्तर पर हुए लाठीचार्ज मामले में अभी तक  किसी का बयान दर्ज नहीं किया गया है। जांच अधिकारी एसपी प्रोटोकोल अशोक कुमार त्रिपाठी हैं।
फर्जी खुलासे पर कार्रवाई नहीं
सराफ धन कुमार जैन पर हमले का फर्जी खुलासा मामले में पुलिस की गलती सामने आने के बावजूद अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं की गई है। इसकी जांच भी एसपी प्रोटोकोल कर रहे हैं।
यह था मामला
22 नवंबर को सराफ धन कुमार जैन पर हमला हुआ था। इसके विरोध में 23 को आईजी दफ्तर पर धरना दे रहे भाजपाई और व्यापारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को भी पीटा गया। इसके बाद पुलिस ने केस का फर्जी खुलासा किया। तभी से भाजपा ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
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