शैलेंद्र अग्रवाल जालसाजी प्रकरण में शुरू से दबाव में नजर आ रही पुलिस ने दो महीने लंबी जांच पड़ताल के बाद बुधवार को चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन इसमें बड़ा खेल कर दिया। जालसाज से दो सबसे संगीन धाराएं हटा ली गई हैं। उसे अब जमानत मिलने में आसानी हो सकती है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने धाराएं हटाने के लिए रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला का बयान दो बार दर्ज किया।
इसके विपरीत एफआईआर में जिन पांच दरोगाओं को जालसाजी का शिकार बताया गया, उनसे एक बार भी पूछताछ नहीं की गई। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश को भी दरकिनार किया, जिसमें कहा गया है कि संगीन मामलों में चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने से पहले विधिक राय ली जाए। इस केस में बगैर विधिक राय के सीधे चार्जशीट दाखिल की गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दरोगा विजय सिंह की पत्नी श्वेता सिंह की ओर से 28 अप्रैल को दर्ज एफआईआर की जांच के दौरान पीड़िता के दो मई को लिए गए बयान के आधार पर धन वसूली के लिए जान से मारने की कोशिश करना या धमकी देने की धारा 386 और एससी-एसटी एक्ट 3 (2) 5 लगाए गए थे।
श्वेता सिंह का बयान था, ‘शैलेंद्र ने मुझे धमकी दी कि 30 गुंडे भेजकर तेरे पूरे खानदान का खात्मा करा दूंगा’। 23 जून तक दोनों धाराएं कायम रहीं। इस बीच शैलेेंद्र का रिमांड भी हुआ। तब भी धाराएं तरमीम नहीं की गईं। लेकिन 23 जून के बाद अचानक से कहानी बदल गई। पहले जांच अधिकारी बदला गया। सीओ सदर असीम चौधरी से जांच सीओ फतेहाबाद सोमेन वर्मा को दे दी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सोमेन ने बगैर किसी औचित्य के श्वेता सिंह का फिर से बयान लिया। आश्चर्य यह कि उनका बयान बदल गया। अब उन्होंने कहा, ‘शैलेंद्र ने धमकी दी थी कि 30 गुंडे भेजकर तेरा दिमाग ठीक करा दूंगा’।
इसी आधार पर पुलिस ने धारा 386 हटा दी। इससे अपराध की गंभीरता कम हुई। इसी के असर से एसएसी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)5 से बदलकर 3 (1) 10 कर दी गई। कानून के जानकारों के मुताबिक धारा 386 और एसएसी एसटी एक्ट 3 (2) 5 में दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है, जबकि एससी-एसटी एक्ट 1 (3) 10 में पांच साल तक की कैद ही मुमकिन है।
अब चार्जशीट में शैलेेंद्र पर जो धाराएं लगाई गईं हैं, उनमें किसी में भी दोष सिद्ध होने की सूरत में सात साल से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है। उधर, श्वेता की ओर से दर्ज एफआईआर में शैलेंद्र की जालसाजी के शिकार पांच दरोगाओं समेत कई पुलिसकर्मियों के नाम दिए गए थे। उनके बयान नहीं लिए गए। अब पुलिस अधिकारी चार्जशीट के बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
हैरानी
- जिन धाराओं में 10 साल तक की सजा का प्रावधान, वे दोनों हटा लीं।
- चार्जशीट में सात साल से अधिक सजा के प्रावधान वाली कोई धारा नहीं।
- धाराएं हटाने के लिए पीड़ित महिला का बयान दो बार दर्ज किया गया।
- चार्जशीट दाखिल करने से पहले विधिक राय नहीं ली गई।
इन धाराओं में चार्जशीट
- अमानत में खयानत ( 406), अपशब्द बोलना ( 504), जान से मारने की धमकी देना ( 506), धोखाधड़ी (420), कूटरचित दस्तावेज ( 468), कूटरचित दस्तावेजों का असली की तरह इस्तेमाल करना ( 471), 3 (1) 10 एसटी-एसटी एक्ट, 66 सी , 66 डी आईटी एक्ट।
इनके बयान नहीं लिए
- एफआईआर में दरोगा लक्ष्मण सिंह, जितेन्द्र दीखित, यशपाल सिंह, छोटे लाल, कामता प्रसाद, दुष्यंत तिवारी समेत कई पुलिसकर्मियों को शैलेंद्र अग्रवाल की जालसाजी का शिकार बताया गया लेकिन पुलिस ने इनके बयान दर्ज नहीं किए।