ट्रांस यमुना कालोनी स्थित संजीवनी हास्पिटल में इलाज के दौरान मरीज की मौत के बाद घरवालों ने जमकर हंगामा किया। डाक्टर पर इलाज मेें लापरवाही का आरोप लगाया। गुस्साए लोगों ने शव को हास्पिटल के बाहर रख दिया। तोड़फोड़ का प्रयास किया। इस पर स्टाफ भाग खड़ा हुआ। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया।
इटावा निवासी हुब्बी सिंह (46) पुत्र बिरजू सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। वह शुक्रवार देर शाम को चकरनगर से बाइक पर घर लौट रहे थे। हाईवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से वह घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर आगरा रेफर कर दिया गया। रात दस बजे उन्हें संजीवनी हास्पिटल में भर्ती कराया। बेटे शिवम का आरोप है कि यहां डाक्टर ने पिता हुब्बी को आईसीयू में भर्ती कर दिया।
इसके बाद 40 हजार रुपये दवाएं और अन्य खर्च के लिए जमा करा लिए। रात भर आईसीयू में नहीं जाने दिया। शनिवार शाम तकरीबन साढ़े तीन बजे उनके रिश्तेदार आईसीयू में जाने लगे तो उन्हें भी रोक दिया। एक लाख रुपये और मांगे। कुछ देर बाद पता चला कि पिता की मौत हो गई है। तब भी उन्होंने अंदर घुसने का प्रयास किया तो स्टाफ ने उनके पिता के शव को एक कमरे में ताला डालकर बंद कर लिया। बाद में डाक्टर ने पुलिस भी बुला ली। परिवारीजनों के हंगामे पर शव सौंपा। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने हंगामा किया और शव को हास्पिटल के गेट पर रख दिया। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हेें शांत किया। इंस्पेक्टर ने बताया कि परिवारीजनों ने अभी उन्हें कोई तहरीर नहीं दी है।
मरीज के गंभीर चोट थीं। मरीज को भर्ती कराने के समय तीमारदारों ने 14 हजार रुपये जमा किए थे। गंभीर हालत होने पर आपरेशन और ब्लड की जरूरत बताई और 22 हजार रुपये जमा कराने को कहा। इस पर तीमारदार मरीज को ले जाने लगे। बकाया के तकरीबन तीन हजार रुपये जमा करने की कहने पर तीमारदारों ने स्टाफ से मारपीट की।
डा. भूपेंद्र प्रसाद, चिकित्सक, संजीवनी हास्पिटल