सीएम अखिलेश यादव की सुरक्षा में की गई चूक को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। गोपनीय जांच शुरू करा दी गई है। इसमें मालूम किया जा रहा है कि पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई या नहीं। लापरवाही पर एलआईयू से भी जवाब तलब किया जा सकता है।
इस मामले में अब दो जांच चल रही हैं। एक तो एसएसपी करा रहे हैं। इसमें इनर रिंग रोड और साइकिल ट्रैक पर तैनात किए गए पुलिसकर्मियों के बारे में जानकारी की जा रही है। तीन सस्पेंड कर दिए गए हैं। जो बाहर के जनपद से आए थे, उन पर कार्रवाई अगली रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दूसरी जांच शासन करा रहा है।
इसमें मालूम किया जा रहा है कि अधिकारियों ने सीएम के आने से पूर्व खुद कितनी बार मुआयना किया। ड्यूटी किस आधार पर लगाई गई। भीड़ के आने के बारे में कोई खुफिया रिपोर्ट थी या नहीं। अगर थी तो उस पर क्या अमल हुआ। यह जांच अधिकारियों को भारी पड़ सकती है। इनर रिंग रोड टोल प्लाजा पर तो भीड़ को रोकने के लिए रस्सी लगाई गई थी। पुलिस अधिकारी आखिर तक हरकत में नहीं आए। व्यवस्था दरोगा और सिपाहियों के भरोसे रही। इसी के चलते इतना हंगामा हुआ और सुरक्षा में चूक हो गई। साइकिल ट्रैक पर तो अव्यवस्था का यह आलम था कि सीएम के बेटे अर्जुन की साइकिल चलाने की ख्वाहिश ही टूट गई।
उन्होंने धक्का मुक्की देख साइकिल न चलाने का निर्णय लिया। वह पिता के साथ साइकिल चलाना चाहते थे। उन्होंने साइकिल ट्रैक पर थोड़ा आगे जाकर साइकिल चलाई।
अफसरों ने पुलिस को अलर्ट नहीं किया
आगरा। सीएम की सुरक्षा में चूक की सबसे बड़ी वजह पुलिस का पहले से चौकन्ना न होना माना जा रहा है। इनर रिंग रोड और साइकिल ट्रैक पर लगाए गए पुलिसकर्मी सीएम की फ्लीट आने तक आराम से बैठे रहे। उन्हें अफसरों ने भी अलर्ट नहीं किया। जैसे ही सीएम की फ्लीट आए, आस पास खड़े लोग उनके नजदीक आ गए। हर कोई उनके बेहद करीब आने को बेताब था। सुरक्षा घेरा कमजोर था, भीड़ के दबाव से टूट गया। इस पर सीएम ने डीएम और एसएसपी पर नाराजगी भी जाहिर की थी।