मिढ़ाकुर। पुलिस की लापरवाही ने मिढ़ाकुर कस्बे में बवाल करा दिया। ग्रामीणों ने इसके बाद जयपुर हाईवे पर जाम लगाने का प्रयास किया। पुलिस से उलझ पड़े। थाना प्रभारी के साथ हाथापाई भी कर दी। बाद में एसडीएम के आश्वासन पर वे मान गए।
बता दें कि कस्बे में सफीक पुत्र हनीफ की दो दुकान हैं। करीब एक दशक पहले सफीक ने एक दुकान सपा नेता रवि को किराए पर दे दी। लेकिन अब रवि भी उन पर अपना मालिकाना हक जताने लगा। इससे उनमें रंजिश पैदा हो गई। 14 अप्रैल को सफीक के बाइक सवारों ने गोली मार दी थी। इसमें रवि समेत एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने रवि को हिरासत में भी ले लिया। इसके बाद मामले की गवाहों को भी रात भर थाने में बैठाए रखा। आरोप है कि मामले में थाने में ही सुलह करा दिया गया। लेकिन मामले में शर्त रखी कि एक हफ्ते में रवि दुकान खाली कर देगा। लेकिन करीब 10 दिन से अधिक समय गुजरने पर भी ऐसा नहीं हुआ तो सफीक के समर्थक मंगलवार सुबह दुकानों पर आ गए।
उन्होंने दुकानें नहीं खुलने दी। सूचना पर थान मलपुरा थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ पहुंच गए।
उन्होंने दुकानों से ग्रामीणों को हटाने का प्रयास किया तो ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। इस दौरान थानाध्यक्ष ने सफीक के चाचा काले का कॉलर पकड़ लिया।
इससे गुस्साए ने थानाध्यक्ष को धक्का मार दिया। यह अन्य पुलिस कर्मी उखड़ गए। लेकिन ग्रामीणों के हाथों में ईंट-पत्थर देख उनके होश उड़ गए। उन्होंन पीछे ही लौटने में भलाई समझी। इस दरम्यान ग्रामीणों ने जयपुर हाईवे पर जाम लगाना शुरू कर दिया, लेकिन कुछ देर में एसडीएम सदर और सीओ आ गए। उन्होंने ग्रामीणों को बमुश्किल समझा। साथ ही मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर ग्रामीण मान गए।
दोनाें बैनामा और जानलेवा हमले की जांच के आदेश दिए हैं। बैनामा फर्जी होने की स्थिति में भी मुकदमा पंजीकृत कराया जाएगा।-- एमपी सिंह, एसडीएम सदर।