शाहगंज के अर्जुन नगर में किराए पर रहने वाली विमला (75) और उसकी बेटी वीना ( 55) की मौत का रहस्य और गहरा गया है। शनिवार को एक कमरे में विमला का कंकाल मिला था। दूसरे में वीना की लाश। माना जा रहा था कि रविवार को उनका कोई न कोई परिचित जरूर पहुंच जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। परिवारीजन और रिश्तेदार में से कोई नहीं पहुंचा। पड़ोसियों से भी पुलिस को कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई। शवों का पोस्टमार्टम तीन दिन बाद किया जाएगा। तभी पता चल पाएगा कि दोनों की मौत कैसे हुई?
परिवारीजन और रिश्तेदारों में से किसी के न आने के चलते दोनों के शवों को फिलहाल लावारिस माना गया है। ऐसे शवों का पोस्टमार्टम तीन दिन के इंतजार के बाद किया जाता है। वीना के बारे में बताया गया है कि वह एक स्कूल में पढ़ाती थी लेकिन इसका भी कोई दस्तावेज घर से बरामद नहीं हुआ है। घर से ऐसा कोई फोटो या दस्तावेज नहीं मिला है जिससे उनके परिवार के बारे में कुछ जानकारी हो सके। पुलिस को इतना जरूर पता चला है कि अर्जुन नगर से पहले दोनों प्रतापपुरा में किराए पर रहती थीं। यह भी जानकारी आई है कि एसएन मेडिकल कालेज से पहले विमला ने बरेली में नर्स थीं, लेकिन यह भी सुनी सुनाई बातें हैं। इनका कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
सवाल जो उलझा रहे
- सबसे बड़ा सवाल यह है कि विमला की मौत कैसे हुई, ऐसी क्या वजह रही कि बेटीवीना ने मां की मौत पर विलाप तक नहीं किया ? फिलहाल माना जा रहा है कि वीना मनोरोगी होगी, उसे अहसास ही न हुआ होगा।
- पुलिस के सामने दूसरा प्रश्न यह है कि विमला की मौत के बाद उसकी लाश के कंकाल बन जाने तक वीना उसके साथ कैसे और क्यों रही? अभी सिर्फ अनुमान है। इसकी वजह भी उसका मनोरोगी होना मानी जा रही है।
- तीसरा प्रश्न यह है कि मां-बेटी के रिश्तेदार और परिवारीजन में से कोई भी अभी तक क्यों नहीं आया, जबकि वे आगरा की ही रहने वाली थीं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उनका पता लगा लिया जाएगा।
रावतपाड़ा में पढ़ी थी विमला
पुलिस को घर में एक बैग मिला। खोलकर देखा तो इसमें कागजात के साथ विमला की दसवीं की अंकतालिका रखी हुई थी। उसने रावतपाड़ा के राम स्वरूप सिंघल गर्ल्स इंटर कालेज से 1955 में थर्ड डिवीजन से हाईस्कूल किया था। । पुलिस सोमवार को स्कूल में जाकर मार्कशीट के माध्यम से विमला के बारे में और जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी।
1990 में हुई थी सेवानिवृत्त
फोरेंसिक टीम को घर में एक जगह पर्स मिला। इसमें 20 रुपये रखे मिले। साथ एसबीआई की पासबुक मिली। एक कागज से पता चला कि विमला नर्स के पद से 1990 में सेवानिवृत्त हुई थी।
न आधार कार्ड, न वोटर कार्ड
पुलिस ने पूरा घर छान मारा लेकिन विमला और वीना में से किसी का फोटो नहीं मिला। न आधार कार्ड था और न वोटर कार्ड और न ही राशन कार्ड। इससे पता चलता है कि वह घर के बाहर की दुनिया से दूर थी।
खाने का सामान भी नहीं
घर में खाने का कोई सामान नहीं मिला। टीवी, फ्रिज, कूलर थे लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं था। रसोई में दो सिलेंडर थे लेकिन चूल्हे पर धूल की मोटी परत चढ़ी थी। गैस का इस्तेमाल काफी लंबे समय से नहीं हुआ। एक बर्तन में थोड़ा सा पानी था।
कहीं तंत्र मंत्र तो नहीं
पड़ोस के लोगों ने बताया कि काफी समय पहले दोनों हवन पूजन काफी करती थी। घर में अगरबत्ती और धूपबत्ती भी मिली हैं। लेकिन पुलिस का कहना है कि वहां ऐसी कोई चीज नहीं मिली जिससे जादू टोना या तंत्र मंत्र की तरफ शक जाए।
पुलिस को 24 घंटे बाद आई फोरेंसिक जांच की याद
आगरा। मां-बेटी की मौत की गुत्थी उलझ जाने के पीछे पुलिस की भी लापरवाही रही है। इतने रहस्मय मामले में फोरेंसिक एक्सपर्ट को तुरंत बुलाने के बजाय 24 घंटे बाद बुलाया गया। तब क्राइम सीन पूरी तरह से नष्ट हो चुका था। मौके पर न शव थे और न ही इनके पास रखा सामान। सब इधर उधर हो चुका था। इसके चलते फील्ड यूनिट की टीम कोई सुराग नहीं लगा पाई।
फोरेंसिक एक्सपर्ट रविवार सुबह तकरीबन 11 बजे पहुंचे। सबसे पहले उस कमरे का चेक किया, जिसमें वीना की लाश मिली थी। इसमें से माचिस के पैकेट, पूजन स्थल, बक्सा से साक्ष्य जुटाने की कोशिश की गई। इसके बाद किचिन को चेक किया। किचिन में राशन नहीं मिला। इसके बाद दूसरे कमरे को चेक किया। यहां से भी साक्ष्य जुटाए गए। उधर, पुलिस ने शव और कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। चिकित्सकों ने फोरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में ही पोस्टमार्टम की बात कही है। चिकित्सकों ने तर्क दिया है कि इस मामले में प्रत्येक बिंदु पर जांच होना आवश्यक है।