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पांच महीने से मां की लाश  के साथ रह रही थी बेटी 

Sun, 26 Feb 2017 01:17 AM IST
पांच महीने से मां की लाश  के साथ रह रही थी बेटी 
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पांच महीने से मां की लाश  के साथ रह रही थी बेटी  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कंकाल को देखकर विशेषज्ञ चिकित्सक विमला की मौत लगभग पांच महीने पहले की मान रहे हैं। वहीं वीना की मौत लगभग 10 से 15 दिनों पहले हुई होगी। एसएन मेडिकल कालेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. अजय अग्रवाल का कहना है कि क्राइम सीन देखने के बाद लगता है कि पांच महीने पहले ही मौत हो चुकी है। कंकाल बनने में अमूमन इतना समय लग जाता है। 
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उन्होंने बताया कि किसी की मौत होने के बाद लाश से 24 घंटे के अंदर दुर्गंध आना शुरू हो जाती है। 15 से 20 दिन में डी-कंपोज (सड़ने) की प्रक्रिया शुरू होने लगती है। विमला की मौत के मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा। उसकी सिर्फ हड्डियां ही पुलिस को मिली हैं। कंकाल से किसी तरह की दुर्गंध भी नहीं आ रही है। मांस भी कहीं हड्डी पर नहीं मिला है। इससे उसकी मौत तकरीबन पांच महीने में ही होने का अनुमान है। वहीं उसकी बेटी वीना की लाश कई जगह से जली हुई प्रतीत हो रही है। डा. अग्रवाल बताते हैं कि लाश वैसीकल फार्मेशन में आ जाती है। इसके शरीर से गैस निकलने लगती है। इससे मांस पर छाले पड़ने लगते हैं, जिसे लोग जलना समझ जाते हैं। वीना के मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा। उसके शव पर कई जगह छाले पड़े हुए हैं। वह जली नहीं हैं। ऐसा दस दिन पुरानी लाश में होता है। उसकी मौत इतने ही दिन पहले हुई होगी। यह दशा दोनों की मौत स्वाभाविक होने की तरफ इशारा करती हैं। 

यह है कहना 
- लाश से 24 घंटे के अंदर आने लगती है दुर्गंध 
- 20-25 दिन में डी-कंपोज होना शुरू हो जाता
- कंकाल बनने में लगते हैं तकरीबन पांच महीने 
- शरीर से गैस निकलने के चलते मांस पर पड़ते छाले 

कब क्या हुआ 
11:00 बजे : पुलिस का घर से दुर्गंध आने की सूचना मिलती है। 
11:15 बजे : पुलिस मकान पर पहुंचती है। कमरे में लाश मिली। 
11:30 बजे : दूसरा कमरा खोला जाता है। उसमें से कंकाल मिलता है। 
11:45 बजे : सीओ लोहामंडी मौके पर आते हैं, फोरेंसिक टीम नहीं। 
12:00 बजे : पुलिस ने लाश उठाने के लिए एक युवक को बुलाया। 
12:45 बजे : पुलिस ने दोनों की लाशों को उठवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। 
.............
नेक्रोफीलिया की मरीज हो सकती है वीना 
आगरा। वीना की मौत करीब 10-15 दिन पहले और मां की मौत पांच महीने पहले हुई है। ऐसे में साफ है कि वीना लगभग पांच महीने लाश के साथ रही। विशेषज्ञों की नजर में ये बीमारी नेक्रोफीलिया है। 
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मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डा. दिनेश राठौर बताते हैं कि वीना गंभीर मानसिक रोगी रही होगी। जिन हालातों में विमला का कंकाल मिला है, साफ है कि वीना ने लाश के साथ समय बिताया। उन्होंने बताया कि ये बीमारी नेक्रोफीलिया कही जाती है। इसमें मरीज को शव से उतना ही लगाव रहता है, जैसे कि व्यक्ति के जीवित होने पर। ऐसे मरीज प्रतिक्रिया (रोना, किसी को बताना) व्यक्त नहीं करते हैं। शव का अंतिम संस्कार करने का विचार भी दिमाग में नहीं आता। भारत में ऐसे मरीज बहुत ही कम पाए जाते हैं। 
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