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ज्यादा जेवरात वाला बैग ही लूटा बदमाशों ने

Mon, 19 Oct 2015 02:15 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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ज्वेलर लक्ष्मी नारायण गोविंद प्रसाद के कर्मचारी रिंकू को गोली मारकर 45 लाख जेवरात और सात लाख कैश से भरा बैग लूट लिए जाने की वारदात के पीछे सटीक मुखबिरी मानी जा रही है। जिस बैग में यह सारा माल था, बदमाशों ने उसे ही लूटा। दूसरा बैग रमेश नाम का कर्मचारी लेकर रिंकू के साथ ही चल रहा था। इसमें बहुत कम सामान था। बदमाशों ने इसे लूटने की कोशिश तक नहीं की।
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वारदात मुश्किल से दो मिनट में हो गई। बदमाश पहले से भीड़ के बीच ही घूम रहे थे। उन्हें इंतजार था ज्वेलर और उनके कर्मचारियों का। जैसे ही ये लोग चांद मेडिकल स्टोर के सामने बैठे, बदमाश उनके नजदीक आ गए। कोई बदमाशों को पहचानता नहीं था। एक बदमाश ने रिंकू की कनपटी पर गोली मारी। भीड़ ज्यादा थी, शोर भी बहुत था। साथ चल रहे उसके साथियों को गोली की आवाज सुनाई दी, तब वारदात का पता चला। गोली लगते ही रिंकू गिर पड़ा।
उसके साथी भागने लगे। बाजार में भी भगदड़ मच गई। बदमाश बैग लेकर नहीं गए थे। दूर जाकर लोग देख रहे थे। उन्हें लगा कि बदमाश भाग रहे हैं, वापस नहीं आएंगे। लेकिन, बदमाश चार पांच कदम ही भागे थे। रुके और फिर वापस आ गए। बैग उठाया और फिर दोनों बदमाशों ने पिस्तौल हवा में लहरा दी। एक बार दूर खड़े लोगों की ओर निशाना किया। लोग और दूर भागने लगे। बदमाश बड़े आराम से पैदल ही चलते रहे। थोड़ी दूर उनका साथी बाइक स्टार्ट किए खड़ा था। बदमाश बाइक पर बैठे। एक ही बाइक से तीनों भाग निकले।
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--। 30 साल उम्र, इकहरा बदन
चश्मदीदों ने बताया कि दोनों बदमाश लगभग 30 साल की उम्र के थे। बदन इकहरा था। दोनों ने जींस और टी शर्ट पहन रखी थी। एक भी शब्द नहीं बोले, इसलिए बोली का पता नहीं चल पाया। दोनों के हाथ में पिस्तौल थी। एक गोली चलाने के बाद बदमाश अपनी पिस्तौल को लोड करने लग गया। थोड़ी दूर बाइक स्टार्ट करके उनका जो साथी खड़ा था, उसे कोई ठीक से देख नहीं पाया। तीनों को बाइक पर जाते हुए देखा गया।
थाना-चौकी पास होने का क्या फायदा
--। घटना के बाद गुस्से में आए व्यापारियों ने पुलिस को निशाने पर लिया। थाना पुलिस 20 मिनट में पहुंची। पुलिस चौकी तो बिल्कुल पास में है। व्यापारियों का कहना था कि वहां कोई था ही नहीं। अधिकारियों के पहुंचने पर व्यापारियों ने कहा कि थाना और चौकी पास में होने का क्या फायदा है? अगर पुलिस थोड़ी भी चौकस होती, तो बदमाश पकड़े जा सकते थे।
--। रिंकू की हालत बहुत गंभीर
घायल रिंकू को पहले एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां से पुष्पांजलि लाया गया। उसकी हालत बहुत गंभीर बताई गई है। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। गोली सिर में लगी है। डाक्टरों ने बताया कि अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। अगले 72 घंटे खतरे से भरे हैं। उधर, उसके परिवारीजन अस्पताल में बने मंदिर में ही देर रात तक उसकी सलामती के लिए प्रार्थना करते रहे।
लुटेरों ने उठाया चुनाव का फायदा
आगरा। पंचायत चुनाव में रविवार को तीसरे चरण का मतदान था। शहर की पुलिस देहात में गई थी। थानों में तीन-चार सिपाही और एक दो दरोगा रह गए थे। चौकियां तो खाली पड़ी थीं। चेक पोस्ट पर कोई नहीं था। चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस नहीं थी। बदमाशों को इसका फायदा मिला। उनके भागने के बाद एक तो पुलिस देरी से पहुंची। दूसरा चेकिंग में ढिलाई रही। कई चौराहों पर तो कोई चेक करने वाला ही नहीं था। बदमाश बड़ी आसानी से दूर निकल गए।
क्या रिंकू पहचानता था बदमाशों को ?
पुलिस इस सवाल में उलझी है कि बदमाशों ने रिंकू को सीधे गोली क्यों मारी? वो भी कनपटी पर। बदमाशों के चेहरे खुले थे। उनके लिए हवा में फायर करके लूट करना मुश्किल नहीं था। शक यह है कि कहीं रिंकू बदमाशों को पहचानता न हो। वह इस शोरूम पर तीन साल से काम कर रहा है।
चप्पे चप्पे से वाकिफ थे बदमाश
जिस जगह वारदात अंजाम दी गई, वह शहर का व्यस्ततम इलाका है। जिस समय वारदात हुई, वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। दुकानों पर भीड़ लगी थी। बदमाश गलियों से होकर भागे। उन्हें बैग लेकर पहले पैदल और फिर बाइक से भागने में जरा भी परेशानी नहीं हुई। ऐसा लगा जैसे चप्पे चप्पे से वे वाकिफ हों।
रमेश ने किया पीछा तो पिस्तौल तानी
रिंकू को गोली मारकर बैग लूट लिए जाने के बाद जब बदमाश भागने लगे तो कर्मचारी रमेश ने पीछा किया। लेकिन बदमाशों ने उसे पिस्तौल दिखा दी, वह डर गया। आस पास खड़े लोगों में से कोई भी बदमाशों का पीछा करने की हिम्मत नहीं दिखा पाया।
फिर भड़क सकता है व्यापारियों का गुस्सा
सुशील जैसवानी हत्याकांड से भी सबक नहीं लिया पुलिस ने
शहर से लेकर देहात तक बदमाश लगातार कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं। राजा मंडी में सुशील जैसवानी की हत्या के बाद व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा था। कई दिन बाजार बंद रहा था। तब पुलिस के आला अफसरों ने भरोसा दिया था कि अब व्यापारियों की सुरक्षा में कोई चूक नहीं होगी। लेकिन ढिलाई फिर से सामने आ गई। त्योहारी सीजन होने के बावजूद प्रमुख बाजारों में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।
ऐसे में व्यापारियों का गुस्सा फिर से फूट सकता है। खास तौर पर सराफा कारोबारी पुलिस से नाराज हैं। सराफ लगातार बदमाशों का निशाना बन रहे हैं। शहर ही नहीं, देहात में भी। प्रमुख बाजारों के अंदर लूट हो रही हैं। पुलिस एक केस खोल नहीं पाती कि दूसरी घटना हो जाती है।
- 18 अप्रैल : बिचपुरी नहर पर बाइक सवार आधा दर्जन नकाबपोश लुटेरों ने सराफ श्रीभगवान सिंह से तमंचों के बल पर 30 लाख रुपये के आभूषण और ढाई लाख की नगदी लूट ली थी। पुलिस लूट की घटना को मानने को तैयार नहीं थी। बाद में सराफ ने डीजीपी से मामले की शिकायत की थी। इसके बाद ही पुलिस ने घटना के खुलासे के प्रयास किए थे।
- 21 जून : विजय नगर कॉलोनी में पिस्टलों से लैस पांच नकाबपोश बदमाशों ने सराफ रिंकू बंसल और उनके भाई से छह किलो सोने (लगभग 1.62 करोड़ ) के जेवरात से भरे दो बैग लूटे थे। हालांकि पुलिस ने घटना का खुलासा करके चार बदमाशों की गिरफ्तारी की थी। मगर, पूरा माल बरामद नहीं हो सका था। पुलिस के खुलासे पर भी सवाल उठने लगे।
- 9 जुलाई को बाइक सवार बदमाशों ने आवास विकास कालोनी के सेक्टर पांच में प्रांशु ज्वेलर्स के मालिक अशोक सोनी और संदीप सोनी से 30 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात की लूट की थी। हालांकि बाद मेें पुलिस ने वारदात का खुलासा कर दिया था। विक्की बॉक्सर समेत चार बदमाशों को गिरफ्तार कर सात लाख रुपये के जेवरात बरामद किए थे।
- 8 अक्टूबर को बाह थाने के ठीक पीछे सदर बाजार में सराफ लल्ले वर्मा की बाइक सवारों ने लूट के प्रयास के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को बड़ा गांव और नहटौली के बीच से गिरफ्तार कर लिया था।
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