ताजनगरी में जाली करेंसी के एक और बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इसके तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई तक से जुड़े हैं। रैकेट से जुड़े युवक -युवती को पुलिस ने सोमवार दोपहर संजय प्लेस मार्केट से गिरफ्तार किया है। इनसे 100-100 के नोट की 1.5 लाख रुपये की जाली करेंसी बरामद की गई है। दोनों दिल्ली से खेप लेकर कानपुर जा रहे थे। इन्होंने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि नोट पाकिस्तान के कराची की प्रेस में छपे हैं। यहां 2000 और 500 के नए नकली नोट भी छापे जा रहे हैं।
गिरफ्तार युवक पानीपत के अशोक नगर के 5, तहसील कैंप के किशन लाल का बेटा राकेश गोयल (30) है। युवती दिल्ली के कसाबपुरा के सदर नाला रोड की गली छोटी के मकान नंबर 7459 निवासी अय्यूब की बेटी मुबशरा ( 28) है। दोनों दोस्त हैं। युवती पहले कॉल गर्ल रैकेट में काम करती थी। वहीं पर जाली करेंसी के सौदागरों से उसकी मुलाकात हुई। इसके बाद वह पहले नकली नोटों की करियर बनी और फिर सप्लायर। राकेश से दोस्ती के बाद उसे भी इस धंधे में जोड़ लिया।
एएसपी अनुराग वत्स ने बताया कि दोनों से 100-100 की 15 गड्डियां मिली हैं। ये प्रिटिंग मशीन में छपी हुई हैं। दोनों आरोपी जाली करेंसी के संगठित गिरोह से जुड़े हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। उधर पुलिस सूत्रों ने बताया कि इन्हें सप्लाई दिल्ली के आशीष से मिलती थी। वह पश्चिम बंगाल के मालदा के मोहसिन और हामिद से सप्लाई लेता था। मुबशरा को आशीष से 30000 रुपये के असली नोट में 100-100 की नकली नोट की दस गड्डी यानी एक लाख रुपये मिलते थे। वह 45 हजार रुपये असली लेकर एक लाख रुपये की जाली करेंसी को आगे बढ़ाती थी।
देश के दुश्मन
- जाली करेंसी की सप्लाई दिल्ली के आशीष से लेती थी मुबशरा।
- आशीष को वेस्ट बंगाल का मोहसिन और हामिद देते थे सप्लाई।
- आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद के कई युवक -युवतियां रैकेट में शामिल।
मार्केट में आ चुके 2000-500 के नकली नोट
आगरा। मुबशरा और राकेश जाली करेंसी की सप्लाई ऑन डिमांड करते थे। 100, 500, 2000 के जैसे नोटों की डिमांड होती, वैसे ही पहुंचा देते थे। नोटबंदी से पहले 100, 500 और 1000 के नोट चलाते थे। नोटबंदी के बाद पहले 500 और 2000 के नोट चलाए। लोग इन्हें बड़े ध्यान से देखते थे, चलना आसान नहीं था। पकड़े जाने का डर था, इसलिए 100-100 के नकली नोटों की सप्लाई करने लगे। एएसपी अनुराग वत्स ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि यह गिरोह दो हजार और पांच सौ के नकली नोट छाप चुका है। इन्हें चलाया भी गया लेकिन अभी क्वालिटी बहुत बढ़िया नहीं है। पकड़े जाने का डर रहता है। इसलिए सौ-सौ के नोट ही चलाए जा रहे थे। उधर पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस रैकेट ने आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, कानपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर में बड़े पैमाने पर नकली नोट चलाए हैं। मुबशरा की रिश्तेदारी शामली के कैराना में बताई गई है। उसने वहां भी जाली करेंसी की खेप पहुंचाई। इस गिरोह ने सबसे ज्यादा जाली करेंसी दिल्ली में चलाई है। दिल्ली से खेप लेकर अलग-अलग जगह जाते थे। आगरा में पहले भी आ चुके हैं। इस बार कानपुर के लिए जा रहे थे। रास्ते में पकड़ लिए गए। ये नोट बिल्कुल असली जैसे दिखते हैं। इनका कागज, नोट के बीच में तार, सभी चिन्ह असली जैसे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ऐसे नोट पाकिस्तान की कराची और रावलपिंडी में सरकारी छापेखाने में छापे जाते हैं। वहां से आईएसआई इनकी खेप लेकर भारत में भेजती है। यहां उसके एजेंट आगे बढ़ाते हैं।
सिपाही ने चलाया नकली नोट
आगरा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि नकली नोट पकड़े जाने के बाद एक सिपाही ने नोट चलाकर देखा। वह पान की दुकान पर गया। वहां से पान मसाला खरीदा। दुकानदार को सौ का नकली नोट दिया। उसने रख लिया। बचे पैसे सिपाही को दे दिए। बाद में सिपाही ने राज खोल दिया कि वह केवल नोट चलाकर देख रहा था।
11 दिन में दूसरा बड़ा खुलासा
आगरा। 16 फरवरी को एनआईए ने एत्माद्दौला से जाली करेंसी की बांग्लादेशी सप्लायर फातिमा उर्फ लीची को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ में खुलासा हुआ था कि जाली करेंसी पश्चिम बंगाल के मालदा से यूपी में लाई जा रही है। अब 11 दिन के भीतर ही नकली नोटों के नेटवर्क का दूसरा बड़ा खुलासा हो गया।