डेढ़ महीने बाद ‘जिंदा’ लौटी मीनू
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दयालबाग की बसेरा कालोनी के मीनू हत्या केस में डेढ़ महीने बाद शनिवार को नया मोड़ आया। मीनू जिंदा निकली। लेकिन उसने जो बताया वह सुन सब दंग रह गए। उसे एक कोठरी में कैद रखा गया। शोर मचाने पर सिगरेट से दागा जाता था। बता दें कि परिवारीजनों ने उसके लापता होने पर दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। अब यह केस दहेज उत्पीड़न में तरमीम किया जाएगा
टीला बालूगंज निवासी चंदा उर्फ मीनू की शादी ढाई साल पहले बसेरा कालोनी निवासी चिंटू उर्फ विश्वदेव से हुई थी। उनकी डेढ़ साल की बेटी शिवानी है। आरोप है कि डेढ़ साल पहले मीनू के साथ मारपीट की थी। वह किसी तरह ससुराल से भाग आई। महिला थाना में शिकायत की।
इस मामले में ससुराली समझौता करने के बाद उसे अपने साथ ले गए। मीनू के भाई संजय ने बताया कि 20 जुलाई को ससुरालियों ने फोन कर कहा कि वह कहीं चली गई है। थाना न्यू आगरा में गुमशुदगी दर्ज कराई। मीनू का कहीं सुराग नहीं लगने पर हत्या की आशंका जाहिर की।
इसके बाद पति सहित अन्य के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। शनिवार सुबह 8:30 बजे मीनू नौफरी, शमसाबाद में रहने वाली अपनी बुआ सावित्री के घर पहुंची। उसने बताया कि ससुरालियों ने उसके साथ मारपीट की थी। उसकी चोटी काटने के बाद दो लोगों को बुलाया। वह उसे बेहोश करके अनजान जगह पर ले गए। जहां उसे कोठरी में कैद रखा। वह लोग हाथ-पैर बांध देते थे। उसे धमकाया जाता था। शोर मचाने पर एक युवक उसे सिगरेट से दागता था।
रिवारीजन उसे सीओ हरीपर्वत के कार्यालय पर लेकर आए। सीओ का कहना है कि विवाहिता की हत्या नहीं हुई थी। उसके नहीं मिलने पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। अब दहेज हत्या की धारा को दहेज उत्पीड़न में तरमीम किया जाएगा। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।