हर में एक के बाद एक हो रही लूट को रोकने के लिए आईजी सुजीत पांडे ने चेकिंग का प्लान बनाकर इसे लागू करने के सख्त आदेश दे दिए लेकिन पुलिस ने इसे ठेंगा दिखा दिया है। ताजगंज की घटना में एक तो पुलिस अफसर देरी से मौके पर पहुंचे। दूसरा बदमाशों की तलाश के बजाय काफी देर तक पीड़ित से ही सवाल करते रहे। तीसरा बैरियर लगाकर चेकिंग कराना जरूरी नहीं समझा। यह हाल तब है जबकि हाल ही में आईजी ने जोन के छह कप्तानों को चेतावनी दी है कि चेकिंग में ढिलाई पर उन्हें जिम्मेदार माना जाएगा।
दिनेश नगर के दुकानदारों ने बताया कि फोन पर सूचना देने के काफी देर बाद पुुलिस आई। अधिकारियों ने और देर की। पहले बाइक से सिपाही भेज दिए। उन्होंने लुटेरों का पीछा करने के बजाय पीड़ित पर सवालों की बौछार कर दी। इसके आधे घंटे बाद थाने की जीप से पुलिस पहुंची। अब व्यापारी से फिर से सवाल किए गए। उसे अपने साथ जीप में ले गई। उससे पूछा गया कि बदमाश किस दिशा में भागे हैं। घटना के एक घंटे बाद तक भी चेकिंग नहीं कराई गई।
पुलिस का यह रवैया तब है जबकि शहर में बाइकर्स गैंग एक के बाद एक वारदात किए जा रहा है। पुलिस न तो लूट रोक पा रही है। न ही खुलासा कर पा रही है। पिछली आठ में से एक लूट का ही खुलासा हो पाया है। वह भी आधा अधूरा।
फिर हुई रविवार को वारदात
आगरा। इसे इत्तफाक कहें या कुछ और लेकिन सराफों के साथ 60 फीसदी से ज्यादा वारदात रविवार को हुई हैं। इसकी वजह यह मानी जाती है कि छुट्टी के दिन बाजारों में भीड़ कम रहती है। बदमाशों को भागने में आसानी होती है। पुलिस को इसकी जानकारी है। फिर भी रविवार को चौकसी नहीं बरती जा रही है।