मंजू उसे पहले से भी जानती थी। 14 महीने पहले मंजू उमेश के साथ ही चारों बेटियों को साथ लेकर रहने लगी। उमेश ने जगदीशपुरा के गांव मघटई में किराये पर मकान ले लिया। अप्रैल में मंजू ने बेटी जूली की शादी धौलपुर में कर दी। वहीं लक्ष्मी और संजना को अपने गांव में छोड़ दिया।
गिरजा को मंजू अपने साथ ही रख रही थी। उमेश और मंजू दोनों मजदूरी करते थे। मंजू अन्य मजदूरों से बात करती थी। उमेश ने मना किया। उसे शक हुआ कि मंजू उससे बेवफाई कर रही है। इसी पर झगड़ा होने लगा। उसने मंजू को मजदूरी पर जाने से मना कर दिया लेकिन वह जाती रही।
दरी में बांधकर ले गया था शव
हत्या की घटना 17 सितंबर को हुई। उमेश का भाई राधेश्याम और पिता फाल सिंह भी घर में मौजूद थे। उमेश और मंजू के बीच झगड़ा होने लगा। आरोप है कि रात तकरीबन 12 बजे उमेश शराब पीकर आया था। उसने गिरजा पर फावड़े से कई वार करके मंजू की हत्या कर शव के दो टुकड़े कर दिए। इसके बाद रात में ही लाश को दरी में बांधकर राधेश्याम और उमेश ने बाइक से ले जाकर नहर में फेंक दिया। इसके बाद अपने घर सहता चले गए। मंजू की बेटी गिरजा को भी सहता में छोड़ दिया।
12 साल की गिरजा मां की हत्या की गवाह थी। वह परेशान थी। उमेश उसे अपने गांव सहता में अपने घर में छोड़ दिया था। उसे कहीं जाने नहीं देते थे। इसके बाद खुद राजस्थान चला गया था। इस पर गिरजा अपने पिता के पास जाने के रास्ते तलाशने लगी। चार दिन पहले किसी तरह वह घर से भाग निकली। पिता के घर घर पहुंचकर उन्हें बताया कि मां की हत्या करके टुकड़ों को फेंक दिया गया है।
मंगलवार को रनवीर थाना जगदीशपुरा आया। उन्होंने पुलिस को सूचना दी। बिचपुरी चौकी प्रभारी अवनीश त्यागी ने आरोपी उमेश को हिरासत में ले लिया। उसने पूछताछ में घटना कबूल कर ली। इसके बाद उसके भाई राधेश्याम और पिता फाल सिंह भी पकड़े गए। भाई का साला टिंकू फरार है। वह भी घटना में शामिल था। पूछताछ में उमेश ने कहा कि वार तो कई किए लेकिन शव के टुकड़े नहीं किए थे।
हड्डियों का डीएनए परीक्षण कराएगी पुलिस
आरोपी उमेश ने बताया कि शव बिचपुरी से रुनकता की ओर जाने वाली नहर के किनारे झाड़ियों में फेंका था। बुधवार को एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद, सीओ लोहामंडी रितेश कुमार सिंह और थाना जगदीशपुरा के प्रभारी निरीक्षक बैजनाथ सिंह को यहां बाल और कुछ हड्डियां मिलीं। इसके अलावा मंजू के कपड़े पड़े हुए थे। एक दरी भी थी, जिसमें लाश को उमेश लपेटकर लाया था। अब पुलिस बाल और हडडी की मदद से डीएनए कराएगी।
बदबू आती थी, कूड़े की समझकर देखा नहीं
पुलिस का कहना है कि घटनास्थल के पास से रोजाना कुछ युवक दौड़ लगाने जाते थे। उन्होंने बताया कि लाश को नहीं देखा था। मगर, दुर्गंध आती थी। अक्सर लोग कूड़ा फेंककर जाते थे। यह गंध उसकी समझकर कभी देखने नहीं गए।