देह व्यापार के जिस दलदल से महिलाओं को मुक्त कराया गया, एक साल बाद उसी में धंसने के लिए छोड़ दिया गया। आशंका यही है कि संवासनियों को मानव तस्कर ले गए हैं। उन्हें फिर से कोठों पर बेच दिया गया है। इसकी दो वजह हैं।
एक तो तस्कर महीनों से नारी संरक्षण गृह के चक्कर काट रहे थे। माना जा रहा है कि इनके बहकावे में आकर ही संवासनियों ने अपने नाम-पते तक गलत बताए थे। ये लोग उनके रिश्तेदार बनकर मिलने के लिए आते थे। इस पर प्रशासन को शक हो गया था। इसकी जांच शुरू ही हुई थी कि वह उन्हें अपने साथ ले गए।
एसडीएम सदर इलाहाबाद ने संवासनियों के बयान दर्ज किए थे। पहली बार पांच मई 2016 को। इसके बाद 18 अप्रैल 2017 को 18 के, 24 अप्रैल को 12 के और 15 अप्रैल को 15 के बयान दर्ज किए।
एसडीएम ने पाया कि संवासनियों द्वारा दो बार दिए गए बयान में अपने और अपने माता-पिता के जो नाम बताए गए, उनमें भिन्नता है। तभी शक हो गया कि उनके पीछे कोई गिरोह लगा है जो उन्हें बहला फुसला रहा है। कालिंदी विहार स्थित नारी संरक्षण गृह के पास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहां पिछले दो महीनों से काफी लोग मंडरा रहे थे। वे गाड़ियों में आते थे।