आगरा में समाज कल्याण के छह बडे़ अधिकारी और चार प्रमुख कोचिंग सेंटरों के संचालक गबन में फंस गए हैं। उच्च न्यायालय के आदेश पर इनके खिलाफ जिला समाज कल्याण अधिकारी संजीव नयन मिश्र ने सिकंदरा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है।
इन पर आरोप है कि इन्होंने दलित छात्रों को सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग दिलाने के नाम पर 12 लाख 96 हजार रुपये का खेल लिया। पुलिस जल्द ही इनकी गिरफ्तारी कर सकती है, क्योंकि जांच पहले ही हो चुकी है।
यह गबन वर्ष 2009-10 से 2014-15 तक किया गया। दलित छात्रों को कोचिंग दिलाने के लिए यूनिवर्सिटी के कुलपति और समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक को कालेजों से प्रोफेसर चुनने थे लेकिन आगरा में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारियों ने शासन के आदेश को ताक पर रखकर पैसा ठिकाने लगा दिया।
प्राइवेट कोचिंग को दे दिया रुपया
आरोप है कि अधिकारियों ने कोचिंग कराने के लिए मिला रुपया प्राइवेट कोचिंग सेंटर को दे दिया। छह सितंबर, 2016 को यशपाल सिंह नाम के शख्स ने इस गबन की जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय के आदेश पर समाज कल्याण विभाग ने जांच कराई लेकिन गबन की पुष्टि हो जाने के बावजूद न विभागीय कार्रवाई की और न एफआईआर कराई।
इस पर हाइकोर्ट ने समाज कल्याण के प्रमुख सचिव को तलब कर लिया। अब एफआईआर कराई गई है। एसएसपी दिनेश चंद दुबे ने बताया कि गबन की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामला संगीन है। पुलिस को शीघ्र जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
इनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी अंचित मनी भारती, सोबरन सिंह यादव, उमेश द्विवेदी, गौतम कुमार, राजेश कुमार, तत्कालीन मंडल उप निदेशक समाज कल्याण सरोज प्रसाद। राजेश कुमार एसडीएम रहे, उनके पास समाज कल्याण अधिकारी का प्रभार था। इनके अतिरिक्त डाक्टर भीमराम अंबेडकर आईएएस/पीसीएस परीक्षा पूर्व परीक्षण केंद्र के प्रभारी अधिकारी लायक सिंह हैं। कोचिंग सेंटर संचालकों में सेंटर फोर एंबिशन, कैरियर एवेन्यू एजुकेशनल सोसायटी और राम मनोहर लोहिया शिक्षा समिति के प्रबंध निदेशक हैं।