आगरा में एक और मासूम की हत्या कर दी गई। इस बार आरोप एक बालक पर ही है। सिकंदरा क्षेत्र में पांच साल के बालक को नौ साल के बालक ने नाले में फेंक दिया।
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इससे उसकी मौत हो गई। 11 दिन बाद उसकी लाश बरामद हो सकी। पुलिस ने आरोपी बालक को पकड़ लिया है। उससे स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट में मां-बाप के साथ ले जाकर पूछताछ की जा रही है।
ए-519 ईडब्ल्यूएस, शास्त्रीपुरम निवासी पप्पू यादव ऑटो चालक हैं। उनके तीन बच्चे पीयूष (9), अवनी (6) और आयुष (5) थे। पत्नी ऊषा यादव घरों में कामकाज करती हैं। आयुष सेंट फ्रांसिस स्कूल में एलकेजी का छात्र था। 16 नवंबर को पप्पू आटो लेकर चले गए।
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ऊषा काम पर चली गई। दोपहर में 12 बजे घर लौटकर आई तो घर पर आयुष नहीं मिला। इस पर उसने तलाश शुरू कर दी। पड़ोस के लोगों ने बताया कि क्षेत्र का नौ साल का बालक उसे अपने साथ ले गया था।
हत्या
- फोटो : अमर उजाला
इस पर बालक से पूछताछ की। पप्पू के मुताबिक, बालक ने बताया कि वह आयुष को गिर्राज पुरम में एक दुकान पर छोड़कर आया था। मगर, वह दुकान पर नहीं मिला। शाम को घटना की जानकारी पुलिस को दी।
पुलिस ने बालक से पूछताछ की, लेकिन वह सही जवाब नहीं दे रहा था। पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया। इसमें नौ साल के बालक को भी शक के आधार पर नामजद किया गया। परिवारीजनों का कहना है कि बेटे की तलाश में जगह-जगह पोस्टर चिपकाए। आसपास के इलाकों में भी पता किया, लेकिन उसका सुराग नहीं लग सका।
सोमवार दोपहर को इंडस्ट्रियल एरिया सिकंदरा में नाले में एक फैक्ट्री कर्मी ने एक शव उतराता हुआ देखा। इसकी जानकारी पर पुलिस पहुंच गई। उसकी पहचान आयुष के रूप में हो गई। परिवारीजनों ने क्षेत्र के बालक पर ही हत्या का आरोप लगाया।
पुलिस ने घर जाकर उसे हिरासत में ले लिया। सीओ हरीपर्वत एएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि आयुष को नाले में फेंककर आने का आरोप नौ साल के बालक है। इस मामले में पड़ताल के बाद कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी बालक कक्षा दो का छात्र है। मगर, स्कूल में कभी कभार ही पढ़ने जाता था। उसका एक बड़ा भाई भी है। वह पप्पू के घर पर रोजाना जाता था। उसके पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं। इसलिए उनको खाना देने जाता था। इस दौरान आयुष के भाई पीयूष को भी साथ लेकर जाता था। पिता को खाने का टिफिन देने के बाद दोनों कंचे खेलते थे।
कुछ दिन पहले कंचे खेलने के दौरान आरोपी बालक और पीयूष में झगड़ा हो गया था। इससे बालक गुस्से में था। 16 नवंबर को भी जब घर आया तो पीयूष को साथ ले जाने की कहने लगा। मगर, पीयूष घर में नहीं मिला। इस पर वह आयुष को अपने साथ ले गया। उसे नाले में फेंककर अपने घर आ गया। मोहल्ले के लोगों ने उसे आयुष को ले जाते हुए देख लिया था। इसलिए सबसे पहले लोगों ने उसका ही नाम लिया।