सूखा राहत का चेक लेने बैंक पहुंचे किसान धीरेंद्र सिंह (40) को मुआवजा नहीं, मौत मिली। आरोप है कि सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें बंदूक की बट से पीट पीटकर मार डाला। बात सिर्फ इतनी सी थी कि सैकड़ों किसानों के पहुंचने से बैंक में भीड़ हो गई थी। इसी को काबू करने में गार्ड आपा खोकर खून से हाथ रंग बैठा। धीरेंद्र की हत्या की खबर मिलते ही उसके गांव बदनपुर और ससुराल सिरसा से बैंक पहुंचे लोगों ने दो घंटे तक बवाल किया। एसओ फतेहपुर सीकरी की पिटाई कर दी। पुलिस जीप पर पथराव किया। मौके से पकड़े गए एक युवक को पुलिस की हिरासत से छुड़ा लिया। बाद में पुलिस अधिकारियों ने बैंक मैनेजर और गार्ड के खिलाफ केस दर्ज करने और मृतक के परिवार को आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया। तब जाकर बवाल थमा।
कस्बे के मुख्य बाजार स्थित स्टेट बैंक शाखा में शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सूखा राहत राशि के चेक का वितरण किया जा रहा था। फतेहपुर सीकरी के गांव बदनपुर बर्नावई निवासी धीरेंद्र सिंह भी चेक लेने पहुंचे थे। किसानों की भीड़ के चलते अव्यवस्थाएं फैली हुई थीं। इसी बीच बैंक के सिक्योरिटी गार्ड चौमा शाहपुर के चंद्रभान ने पहले किसानों से लाइन बनाने को कहा। इसके बाद अपनी बंदूक की बट से पीटना शुरू कर दिया। आरोप है कि धीरेंद्र को कई बार बट मारी। एक उनके सिर में जोर से लगी। वे लहूलुहान होकर जमीन पर गिरे और उनकी मृत्यु हो गई। वहां मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें लेकर चौधरी चरण सिंह अस्पताल पहुंचे, जहां डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम हाउस आगरा भेज दिया।
उधर, एसडीएम अजीत कुमार और सीओ अछनेरा विजय सिंह पुलिस बल के साथ बैंक में पहुंच गए। धीरेंद्र की हत्या का पता चलने पर बदनपुर और उनके ससुराल सिरसा के ग्रामीण बैंक पर पहुंच गए। बैंक का गार्ड और कर्मचारी भाग निकले। गुस्साई भीड़ ने बवाल करना शुरू कर दिया। लोगों की मांग थी कि किसान का शव उन्हें सौंपा जाए। कुछ लोगों ने एसओ सीकरी के साथ मारपीट कर दी। पुलिस ने एक युवक को पकड़ा तो भीड़ ने जीप पर पथराव करके उसे छुड़ा लिया।
शाम चार बजे तक बवाल चलता रहा। भाजपा सांसद चौधरी बाबूलाल के पुत्र राकेश चौधरी और जिलाध्यक्ष अशोक राणा समेत अन्य नेता मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने मृतक किसान के भाई विजय सिंह से किरावली चौकी में बातचीत की। गार्ड और बैंक मैनेजर के खिलाफ हत्या की तहरीर दी गई है। किसान के परिवारीजनों को कृषि भूमि का पट्टा देने और आर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही बवाल शांत हो सका।