कलेक्ट्रेट के मोबाइल टावर पर चढ़े ई रिक्शा चालक
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प्रशासन द्वारा एमजी रोड पर ई-रिक्शा चलाने की मांग न मानने पर कलेक्ट्रेट में पांच घंटे से अधिक देर तक हाईवोल्टेज ‘ड्रामा’ चला। महिला सहित तीन मयूृरी चालक कलेक्ट्रेट स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गए। इनमें से एक को तो पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने बातचीत का झांसा देकर नीचे बुला लिया, शेष महिला और पुरुष चालक ने खूब छकाया। मांग न मानने की स्थिति में टावर से छलांग लगाने की धमकी दी। आश्वासन के बाद पुलिस की फायर बिग्रेड टीम और अन्य लोगों ने हाइड्रोलिक प्लेटफार्म क्रेन की मदद से उन्हें नीचे उतारा।
मंगलवार सुबह लगभग साढ़े आठ बजे के आसपास ई रिक्शा चालक पूनम दुबे, रिंकू और रईस कलेक्ट्रेट पर पहुंच गए थे। सुबह के वक्त कलेक्ट्रेट में भीड़भाड़ न होने पर ये तीनों हाल ही में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के नजदीक लगे लगभग 95 फुटे ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गए। नौ बजे के बाद जब कर्मचारियों का आना शुरू हुआ तो इन पर नजर पड़ी। आनन-फानन में अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। इस पर एसीएम प्रथम रजनीश मिश्रा, एसीएम चतुर्थ रोहित नंदन तथा सीओ कोतवाली राजेश द्विवेदी फोर्स के साथ मौके पर आ गए। अधिकारियों ने तीनों को समझाने की काफी कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। थोड़ी देर बाद रईस तो बातचीत के लिए उतर आया लेकिन पूनम और रिंकू नहीं उतरे। ये दोनों डीएम को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़े थे। मंगलवार को तहसील दिवस होने के कारण कोई वरिष्ठ अधिकारी कलेक्ट्रेेट में नहीं था। टावर से छलाने लगाने की धमकी पर दोपहर लगभग 12.30 बजे जाल मंगाया गया लेकिन पूनम ने ऊपर से ही जाल पर मिट्टी का तेल डालकर जलती हुई माचिस की तिली फेंकने की कोशिश की। इस पर अधिकारियों ने जाल हटवा दिया।
आखिर में अधिकारियों ने लिखित में उन्हें आश्वासन दिया। दोपहर लगभग दो बजे हाइड्रोलिक प्लेटफार्म क्रेन की मदद से पुलिसकर्मी, गरीब सेना के लव पंडित तथा एक और महिला चालक ऊपर पहुंचे। उन्होंने दोनों चालकों को आश्वासन पत्र दिखाया इसके बाद वे दोनों नीचे उतरे।