आगरा में स्कूल संचालक और प्रधानाचार्य हत्याकांड को लेकर आरोपियों से हुई पूछताछ में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। आरोपी ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को गुमराह किया, बल्कि वारदात को छिपाने का भी पूरा प्रयास किया। इसमें उनके पिता का भी हाथ था। हत्या के बाद ऑफिस में लाशें छोड़कर आरोपी घर गए और बताया कि वो खून करके आए हैं। यह सुनकर मां-बाप सन्न रह गए। बाद में पिता ने लाशें छिपाने को कहा। अगली स्लाइड्स में पढ़िए दिल दहला देने वाली वारदात की पूरी कहानी....
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प्रधानाचार्य विजय कुमार और स्कूल संचालक सुरेंद्र कुमार लवानिया (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
28 जून को सिकंदरा की ओम विहार कालोनी निवासी स्कूल संचालक सुरेंद्र लवानिया और सदर क्षेत्र के रहने वाले प्रधानाचार्य विजय कुमार झा की हत्या कर दी गई थी। रविवार को दोनों के शव कोलक्खा स्थित डॉ बीआर आंबेडकर स्कूल परिसर में गड़े मिले। ये स्कूल सुरेंद्र कुमार का ही है। हत्यारोपी धीरज इसे किराये पर चला रहा था। उस पर 72 हजार रुपये किराया बकाया था। उसने अपने भाई और दोस्तों के साथ इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने धीरज सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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प्रधानाचार्य विजय कुमार झा और सुरेंद्र लवानिया का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र लवानिया और विजय कुमार झा की हत्या 28 जून को दोपहर में की गई थी। दोनों के शव स्कूल के ऑफिस में पड़े थे। धीरज और उसके भाई घर चले गए थे। पुलिस ने बताया कि धीरज ने मां से कहा, आज हम तीनों भाई स्कूल में खून करके आए हैं। यह सुन पिता पप्पूराम भड़क गए, लेकिन थोड़ी देर बाद बोले, लाशें स्कूल में क्यों छोड़ीं? वहां कोई जाएगा, तो भेद खुल जाएगा। इसके बाद पप्पूराम, धीरज, संदीप, नीरज स्कूल गए और गड्ढा खोदकर दोनों लाशों को उसमें गाढ़कर आए।
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पुलिस की गिरफ्त में हत्यारोपी
- फोटो : अमर उजाला
मुख्य आरोपी धीरज ने 29 जून को पहले प्रधानाचार्य विजय कुमार झा के परिवार को गुमराह किया। इसके बाद कुल आठ घंटे तक वो पुलिस को कहता रहा कि झा उससे मिले ही नहीं। झा की पत्नी शीला से कहा, वो मेरे गुरु जी हैं, उनके साथ गलत करने की सोच भी नहीं सकता। आठ घंटे बाद पुलिस ने उसे जैसे ही एक थप्पड़ मारा, उसने सच उगल दिया।
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एस के लवानिया (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
धीरज को पता था कि लाशों को छिपाने के लिए खोदे गए गड्ढे के ऊपर गीली मिट्टी देखकर पुलिस को शक हो जाएगा। इसलिए उसने रात में एक ट्रैक्टर से मिट्टी स्कूल में मंगवाई थी। इसके बाद मिट्टी को स्कूल में फैला दिया था, जिससे पुलिस आए भी तो यह लगे कि पूरे स्कूल में ही मिट्टी डलवाई गई है।
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इसी स्कूल में गड़े मिले दोनों के शव
- फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र लवानिया ने डॉ. बीआर आंबेडकर स्कूल की इमारत तीन हजार रुपये प्रति माह किराये पर दी थी। मुख्य आरोपी धीरज इस स्कूल पर कब्जा करना चाहता था। दो साल से किराया न देने के पीछे उसकी मंशा लवानिया समझ गए थे। उन्होंने किराया वसूलने की जिम्मेदारी विजय कुमार झा को दे रखी थी। झा दबाव बना रहे थे। धीरज से उनका पहले झगड़ा हो चुका था। इस बार धीरज ने साजिश रचकर उनकी और लवानिया की हत्या कर दी।
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स्कूल संचालक सुरेंद्र लवानिया का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षा जगत में सुरेंद्र कुमार लवानिया का बड़ा नाम था। जिले में उनके सात स्कूल और कॉलेज हैं। उन्होंने पांच साल पहले खंदारी में 90.8 एफएम भी खोला था। मूलरूप से मंशा की मढ़इया, धिमश्री, शमसाबाद निवासी सुरेंद्र कुमार लवानिया सिकंदरा की कारगिल स्थित ओम विहार कालोनी में आठ साल से परिवार सहित रह रहे थे। उनके घर में पत्नी सुशीला, बेटी अनामिका, आशी (7) और रुद्र (5) हैं। अनामिका शादीशुदा है।
मूलरूप से दरभंगा, बिहार निवासी विजय कुमार झा (50) पुत्र सोने लाल झा इंदिरापुरम कॉलोनी, सदर में परिवार सहित रहते थे। वो 25 साल पहले आगरा आए थे। सुरेंद्र कुमार लवानिया से परिचय होने के बाद सैनिक भारती इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल बन गए। विजय कुमार ने ही सुरेंद्र कुमार लवानिया को धीरज से मिलवाया था। इसके बाद विजय कुमार ही कॉलेज की जिम्मेदारी देख रहे थे। दोनों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है।