जवाहर बाग हिंसा के मुख्य सूत्रधार रामवृक्ष यादव के शव की डीएनए परीक्षण रिपोर्ट 20 मार्च को मथुरा कोर्ट में रखी जानी है। लखनऊ की फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) में उसके बेटे विवेक यादव के डीएनए के साथ उसके डीएनए का परीक्षण किया जा रहा है। इसमें आगरा एफएसएल के वैज्ञानिक भी लगे हैं। रिपोर्ट पर उन तमाम पुलिस अफसरों की नजरें लगी हैं जो हिंसा की सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं। परीक्षण से जुड़े सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट चौंकाने वाली हो सकती है। तीन महीने से चल रहा परीक्षण अब अंतिम स्टेज में है। दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी।
मथुरा के जवाहर बाग में हिंसा दो जून 2016 को हुई थी। डीएम और एसएसपी आवास के पास स्थित उद्यान विभाग के इस बेशकीमती बाग को रामवृक्ष यादव और उसके लोगों ने दो साल से कब्जा रखा था। इसे खाली कराने के दौरान मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह थाना संतोष यादव शहीद हो गए थे। इसके बाद रात में वहां 25 कब्जाधारियों की मौत हुई थी। पुलिस ने दावा किया था कि बाग में लगी आग में जलकर इनकी जान गई है।
इनमें से ही एक शव कब्जाधारियों के नेता रामवृक्ष यादव का बताया गया था। उसके परिवारीजनों या रिश्तेदारों में से किसी ने शनाख्त नहीं की थी लेकिन पुलिस की ओर से डीजीपी तक ने दावा किया था। बाद में कोर्ट ने पूछा था कि इसका वैज्ञानिक आधार क्या है। तब उसके बेटे विवेक यादव का डीएनए सैंपल लिया गया था। रामवृक्ष के शव का डीएनए सैंपल पहले ही ले लिया गया था। दोनों को परीक्षण के लिए लखनऊ एफएसएल भेजा गया था। कोर्ट ने इसकी रिपोर्ट 20 मार्च तक दिए जाने का आदेश दिया है। इस पर तेजी से परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण से जुड़े सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि शुरू में दोनों के डीएनए आपस में मिल नहीं रहे थे लेकिन इससे नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। परीक्षण अभी चल रहा है। 19 की शाम तक रिपोर्ट तैयार हो सकती है।
तो फंस जाएंगे पुलिस के अफसर
आगरा। अभी डीएनए परीक्षण रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। अगर परीक्षण में रामवृक्ष और विवेक यादव के डीएनए का मिलान नहीं हुआ तो माना जाएगा कि जवाहर बाग हिंसा में रामवृक्ष नहीं मारा गया था। ऐसे में वे पुलिस अफसर फंस जाएंगे जिन्होंने उसकी शिनाख्त का दावा किया था। बता दें, मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा चुकी हैं।