अरविंद कुमार जैन के सेवानिवृत्त होने के साथ ही प्रदेश पुलिस के नए मुखिया जगमोहन यादव हो गए हैं। उनके सामने बिगड़ी कानून व्यवस्था सुधारने के साथ ही चर्चित शैलेंद्र अग्रवाल जालसाजी प्रकरण की जांच की दिशा तय करने की चुनौती है। जांच के दायरे में कई पूर्व और मौजूदा अधिकारी हैं। इन पर कार्रवाई के बारे में किसी तरह का स्पष्ट निर्णय लेने से पहले ही एके जैन का कार्यकाल पूरा हो गया।
पंचम तल तक हड़कंप मचा देने वाले इस प्रकरण की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन उन्होंने ही किया था। उनके पास शिकायत पहुंचने पर ही शैलेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। लेकिन जैसे ही इस प्रकरण से दो पूर्व डीजीपी समेत अधिकारियों के नाम जुड़ने लगे, वैसे ही जांच ठंडी पड़ती चली गई। कार्रवाई डीजीपी स्तर से ही तय होनी थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।
एके जैन कहते रहे कि उन्हें एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट डीजीपी ऑफिस जा चुकी है। इसके बाद ही एसआईटी को शासन से संकेत मिले कि फिलहाल कार्रवाई सिर्फ शैलेंद्र पर होनी है। अब देखना यह है कि जगमोहन यादव कैसा रुख अख्तियार करते हैं?
जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल पर 31 केस दर्ज हो चुके हैं। वह दो महीने से जेल में बंद है, लेकिन चार्जशीट एक मामले में भी नहीं हुई है। उसके साथ नामजद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी नहीं हो पाई है।
सुबूत लेकर चुप बैठी है एसआईटी
एसआईटी के पास वो कॉल डिटेल है, जिसमें शैलेंद्र से अधिकारियों के रिश्ते पता चलते हैं। ऐसे एसएमएस भी हैं जिनमें दो पूर्व डीजीपी शैलेंद्र के साथ दरोगाओं की ट्रांसफर-पोस्टिंग के रेट तय किए थे। इनके अलावा उसने अधिकारियों को अपने बैंक एकाउंट से कैश ट्रांजक्शन कर रखा है। ऐसे तमाम साक्ष्य अभी तक न तो कोर्ट के सामने रखे गए हैं और न ही इस पर जांच आगे बढ़ी है।