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सेना भर्ती रैली से लौट रहे युवक को गोलियों से भूना

Tue, 08 Sep 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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शमसाबाद रोड पर सोमवार दोपहर बाइक सवार चार बदमाशों ने सेना भर्ती रैली से लौट रहे निबोहरा के गजेंद्र सिंह तोमर (22) को आटो से खींचकर गोलियों से भून दिया। उसके भाई ओमकार और दोस्त हरनारायण पर भी गोलियां चलाईं, मगर वे जान बचाकर कोल्ड स्टोरेज में जा छुपे। बदमाश हथियार लहराते हुए भाग निकले। हत्या के पीछे पुरानी रंजिश बताई गई है। पुलिस का कहना है कि इसमें डकैत शिवदत्त के भाई रामदत्त समेत चार लोगों के नाम प्रकाश में आए हैं। उनकी तलाश की जा रही है।
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निबोहरा के गांव धनौला कलां (पुरा भगतू ) के रहने वाले प्रेम सिंह तोमर के पुत्र गजेंद्र और ओमकार गांव के हरनारायण के साथ एकलव्य स्टेडियम में चल रही सेना भर्ती रैली में आए थे। ओमकार ने सुबह सात बजे की शिफ्ट में दौड़ लगाई। गजेंद्र ने दूसरी शिफ्ट में दौड़ा, मगर पिछड़ गया। इसके बाद सुबह 11 बजे तीनों बिजलीघर से शमसाबाद के लिए आटो किए। आटो में दस सवारियां थीं। 11:30 बजे दिगनेर गांव के पास पीछे से दो बाइक पर आए चार बदमाशों ने आटो के आगे बाइक खड़ी कर दी। एक ने आटो चालक की कनपटी पर पिस्टल सटा दी। इसी बीच तीन बदमाशों ने पिछली सीट पर बैठे गजेंद्र को बाहर खींच लिया। गजेंद्र के सिर, मुंह, कनपटी और छाती पर चार गोलियां मारीं। इसी बीच ओमकार और हरनारायण उसे बचाने को दौड़े तो बदमाशों ने उन पर भी फायर कर दिया। दोनों जान बचाने को मन: कामेश्वर कोल्ड स्टोरेज में जा घुसे। इसके बाद बदमाशों ने ओमकार को निशाना बनाकर दो-तीन फायर और किए, मगर गोली नहीं लगी। घटना से दहशत में आए चालक समेत आटो में बैठे लोग भाग खड़े हुए। ओमकार ने कोल्ड कर्मचारियों से मदद मांगी। राहगीर भी मदद को पहुंचे, लेकिन तब तक गजेंद्र की मौत हो चुकी थी। सूचना पर एसपी सिटी, सीओ सदर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। ओमकार ने पुलिस को बताया कि हमलावरों में डकैत शिवदत्त का भाई राजाखेड़ा का रामदत्त, गांव भगतूपुरा के वीरो उर्फ वीरेंद्र, पवन और बनवारी शामिल थे।
बताया गया कि गांव के वीरेंद्र से गजेंद्र के परिवार की रंजिश चल रही है। आरोपी शराब तस्करी करते हैं। पीड़ित पक्ष विरोध करता है। इसी के चलते रंजिश चल रही है।
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एकलव्य स्टेडियम से ही गजेंद्र के पीछे लग गए थे हत्यारे
गजेंद्र के परिवारीजनों ने बताया कि सोमवार को गांव के 40 युवक सेना भर्ती में शामिल होने आए थे। गजेंद्र और ओमकार के बारे में इन लड़कों से हत्यारोपी लोकेशन ले रहे थे। गांव के लड़के ने गजेंद्र के परिजनों को बताया कि हत्यारोपी वीरेंद्र ने गजेंद्र और उसके भाई के स्टेडियम आने के बारे में पूछताछ की थी। इससे साफ है कि हत्यारे सुबह से ही दोनों भाइयों के पीछे लगे हुए थे।
गांव के लोगों का कहना है कि गांव में अवैध तरीके से शराब की बिक्री का विरोध करने पर गजेंद्र को जान गंवानी पड़ी। हत्यारोपी वीरो उर्फ वीरेंद्र परचून की दुकान पर शराब बेचता था। पूरे दिन दुकान पर शराबियों का जमघट लगा रहता था। गजेंद्र के पिता की दुकान भी वीरो की दुकान के पास है। तीन माह पहले गजेंद्र ने वीरेंद्र पक्ष के लोगों की पिटाई कर दी थी। तभी से वे रंजिश मानने लगे थे। सबक सिखाने की धमकी दी गई थी।
गजेंद्र के पिता प्रेम सिंह की परचून की दुकान के बराबर में दुकान चलाने वाले वीरो और पवन दोनों भाई है। ओमकार ने बताया कि दोनों भाई लंबे समय से शराब की तस्करी और बेचने का काम करते हैं। अपनी दुकान पर शराब बेचते हैं। इसके चलते शराबी आए दिन दुकान के सामने ही शराब पीकर झगड़ा करते थे। करीब तीन माह पहले इसी को लेकर गजेंद्र का वीरेंद्र से विवाद हो गया था। गजेंद्र ने वीरो की पिटाई कर दी थी। तभी से दोनों पक्षों के बीच रंजिश चल रही थी। गजेंद्र ने गांव में शराब बेचने का विरोध किया था। हत्यारोपियों ने गजेंद्र को धमकी भी दी थी। धौलपुर के कुख्यात डकैत शिवदत्त के भाई रामदत्त का भी वीरेंद्र के यहां उठना बैठना था। पुलिस ने बताया कि रामदत्त के खिलाफ धौलपुर, सैंया और शमसाबाद में भी दर्जनभर से अधिक मुकदमे हैं।
शमसाबाद रोड पर हत्या से फैली दहशत, अफवाहें
शमसाबाद रोड पर आटो से खींचकर गजेंद्र की हत्या करने की खबर शहर तक पहुंच गई। अफवाह फैली कि शमसाबाद की सांप्रदायिक हिंसा के चलते युवक की हत्या की गई है, लेकिन कुछ ही देर बाद स्थिति साफ हो गई। दिगनेर रोड पर घटना से दहशत फैल गई। काफी देर तक वाहनों का आवागमन भी बंद रहा।
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