अवैध ढंग से पटाखे बनाने के घंधे ने आतिशबाज हफीज (44) की जान ले ली। पटाखा बनाते समय हुए भीषण विस्फोट से उनके शरीर के चिथडे़ उड़ गए। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मकान की दीवारें दरक गईं। दीवारों से प्लास्टर ही नहीं दरवाजा तक उखड़ कर गिरा। हादसेे के बाद परिवारीजनों और बस्ती के लोगों की मदद से आननफानन शव को दफनाया दिया।
बाह के मई गांव में अब्दुल गफ्फार (46) और हफीज पटाखे बनाने का काम करते थे हालांकि उनके पास लाइसेंस नहीं था। बुधवार सुबह लगभग नौ बजे हफीज घर के बाहर ही ‘देसी बम‘ बना रहे थे। तभी अचानक वहां रखे बारूद में विस्फोट हो गया। हफीज के शरीर के चिथडे़ उड़ गए। घर का दरवाजा उखड़ गया। दीवारों में दरारें आ गईं। छज्जे तक का प्लास्टर उखड़ गया। धमाका सुन गांव के लोग पहुंचे तो वहां हफीज का शरीर लोथड़ों के रूप बिखरा पड़ा था। आननफानन में परिवारीजनों ने बस्तीवालों की मदद से टुकड़े एकत्र कर शव को दफना दिया।
हादसे की जानकारी पर इंसपेक्टर ब्रह्म सिंह ने छानबीन की तो वहां कोई मुंह खोलने तक को तैयार नहीं हुआ। पता चला कि यहां बिना लाइसेंस के पटाखे बनाने का खेल चल रहा था। हफीज की भाभी रहीसा बानो ने बताया कि हफीज के पुत्र करीम, रहीस और उनके भी बेटे स्कूल गए थे। वह खुद और उनके पति पति अब्दुल गफ्फार भी घर से बाहर थे। माना जा रहा है कि हादसे के वक्त घर में जो भी होता तो उसकी जान जा सकती थी।