गुदड़ी मंसूर खां में मंगलवार सुबह एक गाय ने वृद्ध पर हमला बोल दिया। वृद्ध के पेट और गर्दन पर सींग मारकर लहूलुहान कर दिया। परिवारीजन अस्पताल ले गए जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना से आक्रोशित व्यापारियों ने बाजार बंद किया। परिवारीजनों ने शव सड़क पर रखकर मुआवजे की मांगी की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आश्वासन देकर लोगों को शांत किया।
खंदौली के गांव खेरिया निवासी बलवीर सिंह उर्फ बल्लो (60) कई साल से अपनी बहन रामबेटी के घर में रहते थे। वह जेनरेटर की प्लेट बनाने वाली दुकान पर काम करते थे। मंगलवार सुबह सात बजे घर से निकलकर काम से जा रहे थे। तभी उन पर गाय ने हमला बोल दिया। कई फुट तक उठाकर जमीन पर पटका। वृद्ध की मौत की जानकारी पर गुस्साए दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं। लोगों का कहना था कि क्षेत्र में रहने वाले कुछ दूध विक्रेता अपनी गाय दिन में छोड़ देते हैं। पिछले 15 दिन में कई घटनाएं हो चुकी हैैं। गाय बच्चों को भी घायल कर चुकी हैं। उन्होंने नगर निगम से उन्हें पकड़ने की मांग की। उधर, घटना स्थल पर लौटे पर परिवारीजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर शव को सड़क पर रख दिया। एसओ छत्ता का कहना है कि मृतक के परिवारीजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
निगम के पास तो कांजी हाउस तक नहीं
शहर में आवारा जानवरों का मुद्दा कमिश्नर और जिलाधिकारी की लगभग हर बैठक में उठता है लेकिन काम के नाम पर कुछ नहीं होता। हालात ये है कि नगर निगम का एक मात्र कांजी हाउस भी वर्षों से बंद पड़ा है। शहर में किसी वीवीआईपी के आगमन पर अभियान चलता है लेकिन यहां भी खानापूर्ति होती है।
शहर का ऐसा कोई इलाका नहीं है जहां आवारा जानवर सड़कों पर घूमते नहीं मिलते, जिसके चलते आए दिन हादसे होते हैं और सड़कों पर जाम लग जाता है। ताजनगरी आने वाले पर्यटक भी कचरों पर मुंह मारते जानवरों के फोटो खींचकर ले जाते हैं, जिससे शहर की छवि खराब होती है। यही नहीं बंदरों और कुत्तों के काटने से कई पर्यटक घायल हो चुके हैं और बंदरों की घुड़की वजह से कई लोग छत से गिरकर जान गंवा चुके हैं। इस समस्या पर हर बैठक में बातें बड़ी-बड़ी होती हैं लेकिन शहर को आवारा जानवरों से निजात नहीं मिल सकी है। जेल रोड पर स्थित नगर निगम का कांजी हाउस पिछले करीब 15 वर्षों से बंद पड़ा है।
बंदर पकड़ो अभियान भी फुस
आगरा(ब्यूरो)। पूर्व मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर के कार्यकाल में बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया था। एसओएस संस्था से बंदरों को पकड़ने कर उनकी नसबंदी का करार किया गया। पहले चरण में 500 बंदरों को पकड़ने के लिए एसएन मेडिकल कालेज और कलेक्ट्रेट में पिंजड़े लगाए गए थे लेकिन इस अभियान का असर नहीं दिख रहा है।
जानवरों को पकड़ने में पिटते हैं निगम कर्मी
आगरा(ब्यूरो)। एक समस्या यह भी है कि नगर निगम के कर्मचारी जानवर पकड़ने जाते हैं तो उनकी पिटाई तक हो जाती है। धार्मिक आस्था के चलते लोग बंदर, सांड और गायों को पकड़ने नहीं देते। कई बार निगम कर्मियों से मारपीट की गई और थानों में एफआईआर तक कराई गई। कांजी हाउस न होने के कारण निगम कर्मी जानवरों को दयालबाग में स्थिति एसपीसीए संस्था में भेज देते हैं, जहां से पशुपालक जुर्माना देकर उन्हें मुक्त करा ले जाते हैं।
वर्जन
नगर निगम का कांजी हाउस बंद पड़ा है। हमारे पास साधन और कर्मचारी सीमित हैं। समय-समय पर अभियान चलाते हैं लेकिन कर्मचारियों के साथ मारपीट की जाती है। आवारा जानवरों की समस्या का समाधान तभी हो सकता है जब पुलिस-प्रशासन के सहयोग से संयुक्त अभियान चले।
डा. योगेश शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी, नगर निगम