आगरा में मृतक किसान के खिलाफ केस दर्ज कराकर जेपी ग्रुप के तीन अधिकारी और एत्माद्पुर थाना का एक दरोगा फंस गया है। कोर्ट ने चारों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश दिया है। दरोगा ने मृतक के खिलाफ चार्जशीट भी लगा दी थी।
जेपी ग्रुप के मनीष कुमार ने एत्मादपुर थाना में 10 सितंबर 2016 को जमीन पर कब्जे का केस दर्ज कराया था। घटना तीन महीने पुरानी बताई गई थी। इसमें अधिवक्ता उदयवीर सिंह, उनके चचेरे भाई महेश, प्रकाश, सतीश, प्रकाशी, सुशील, संजय, हेत सिंह, वीरेंद्र, अशोक, निरंजन, गिरिराज, धर्मेन्द्र, मनोज, अजब सिंह समेत 15 आरोपी थे।
इनमें से महेश की 22 जून 2012 को ही मौत हो चुकी थी। एफआईआर की जांच दरोगा योगेश कुमार ने की। उसने 10 सितंबर 2016 को सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी। इसमें महेश कुमार का नाम भी था।
जांच करने वाला दरोगा भी फंसा
महेश कुमार की केस से पहले मृत्यु हो जाने के बावजूद उन्हें आरोपी बनाया गया। जाहिर है, जांच ठीक से नहीं की गई। आरोपियों को समन मिले तो उन्होंने कोर्ट में धारा 156 ( 3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया।
इस पर स्पेशल सीजेएम आशीष कुमार चौरसिया ने जेपी ग्रुप के मनीष कुमार और खुद को गवाह बताने वाले अधिकारियों और जांच करने वाले दरोगा के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया।
इनके खिलाफ दर्ज होगी रिपोर्ट
जेपी ग्रुप के मनीष कुमार, हाकिम सिंह, आरबी सिंह, पीके शर्मा और छलेसर चौकी के तत्कालीन प्रभारी योगेश कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और मृतक को बदनाम करने की धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा।