फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नफरत की आग में जली सौहार्द की मिसाल

Sat, 05 Sep 2015 02:28 AM IST
धर्मेंद्र यादव
विज्ञापन
विज्ञापन
राम-रहीम की मिली जुली संस्कृति वाले शमसाबाद में किसकी नजर लग गई। नफरत की आग में झुलसते लोग अपने और पराये का फर्क करना भी भूल गए। पुरा गांव में जिस धर्मस्थल पर उन्मादी हाथों ने हथौड़े चलाए, उसके दरोदीवार पर साझा संस्कृति महकती है। इस धर्मस्थल के लिए जमीन देने वाले पप्पू कुशवाह और रफ्फन मियां थे। कुछ साल पहले दोनों ही वर्गों के लोगों ने धर्मस्थल को नया रूप दिया था।
विज्ञापन

गांववालों ने बताया कि बरसों से यहां एक पेड़ के नीचे छोटा सा स्थान था। इसकी सेवादारी गांव के दोनों ही वर्गों के लोग करते थे। इसकी धर्मस्थल की मान्यता बढ़ी तो श्रद्धालुओं का गुरुवार को मेला लगने लगा। धर्मस्थल की सेवा करने वाले ने बताया कि वे हर गुरुवार को यहां आते हैं। श्रद्धालुओं में दोनों ही समुदाय के लोग शामिल हैं। कुछ साल पहले ही गांव के पप्पू कुशवाह और रफ्फन मियां ने पेड़ के नीचे बने इस धर्मस्थल को नया रूप देने के लिए अपनी जमीन दान कर दी। इसके बाद धर्मस्थल को नये सिरे से संवारा गया। इसमें कमरा बनवाया गया। देखरेख करने वाले के लिए बैठने का स्थान बनाया गया। कुछ ही दिन पहले पूरे गांव के लोगों ने चंदा किया और इस धर्मस्थल के चारों ओर चारदीवारी बनवाई गई। लेकिन शुक्रवार की सुबह कुछ उन्मादी लोगों ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने इस धर्मस्थल को भी नहीं बख्शा। गांववालों को जब आस्था के केंद्र पर हमले की जानकारी मिली तो वह भौंचक्के रह गए।
गांव के भगवान सिंह का कहना था कि वे लोग खेतों में काम करने गए थे। उपद्रवी कब आए, पता नहीं चला। अगर इसकी भनक लगती तो वे उपद्रवियों को सबक सिखा देते। इसी गांव से कुछ दूरी पर धमैना रोड पर दोनों समुदाय के लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां कंस मेला लगता है तो नमाज भी पढ़ी जाती है। यहां भी बलवाइयों ने नुकसान पहुंचाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें